हितग्राहियों का कहना है कि लगातार शिकायत के बाद भी दुकान संचालक अपनी मर्जी से दुकान संचालन करते आ रहा है।
जांजगीर-चांपा. अकलतरा विकासखंड के ग्राम नरियरा के शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालक धनंजय निर्मलकर अपनी मर्जी के मालिक है। वह जब मन लगा दुकान को बंद कर दिया जाता है और जब जी चाहा खोला जाता है। यह ग्रामीणों का कहना है। ग्रामीणों ने बताया कि 13 मई को सुबह 5 बजे से हितग्राही लाइन में खड़े होकर लगे थे। लेकिन दुकान नहीं खोला गया।
ग्रामीणों का कहना है कि दुकान नहीं खोला जाता है उस दिन दुकान के सामने बोर्ड लगाकर लिखना चाहिए कि आज दुकान बंद रहेगा। गरीब हितग्राही अपना कामधाम छोड़कर राशन लेने के लिए पहुंचते है। राशन दुकान नहीं खुलने से परेशान होकर चले जाते है। ऐसे में हितग्राहियों को दुसरे दिन का इंतजार करना पड़ता है। हितग्राहियों का कहना है कि लगातार शिकायत के बाद भी दुकान संचालक अपनी मर्जी से दुकान संचालन करते आ रहा है। गरीबों को सस्ता और अच्छा राशन सामान देने के उद्देश्य से सरकार हर संभव प्रयास करती है कि गरीबों को राशन सामान लेने मशक्कत न करनी पड़े, लेकिन इन राशन दुकानों की जिम्मेदारी निभाने वाले संचालक इन दुकानों को अपनी मनमर्जी से संचालित करते है।
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ऐसा मामला जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पंचायत नरियरा के राशन दुकान में सामने आया है। नरियरा के दुकान क्रमांक एक में वार्ड नंबर एक से लेकर 16 व 18 वार्ड के हितग्राहियों को राशन सामान मुहैया कराया जाता है। ग्रामीण राशन दुकान में रोजाना सामान के लिए चक्कर लगा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है कि ग्रामीणों को दुकान से बैरंग लौटना पड़ रहा है। हमेशा की 13 मई को भी दुकान संचालक रविवार को भी दुकान खोलने की जहमत उठाना उचित नहीं समझा। इसको लेकर ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है। इसका ठिकरा कभी भी जिला कार्यालय में फूट सकता है।
ग्रामीणों की मानें तो दुकान क्रमांक एक के संचालक धनंजय निर्मलकर राशन दुकान को सरकारी नियम के तहत संचालित करने के बजाए अपने कायदों से संचालित करना मुनासिब समझता है। इसको लेकर ग्रामीणों को सामान लेने में हमेशा परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण संचालक के इस तरह के रवैये को लेकर आवाज उठाने की कोशिश करते हैं पर ग्रामीणों के इस तरह के छुट-पुट बात-चीत का संचालक पर कोई असर नहीं पड़ रहा। वहीं इसकी सूचना खाद्य विभाग के नुमाइंदों को भी दी जाती है पर विभाग के अफसर कार्रवाई या जांच करने को लेकर गंभीर नहीं है। इससे दुकान संचालक के हौसले सातवें आसमान पर है और वह बेखौफ होकर अपनी मनमर्जी से राशन दुकान का संचालन कर रहा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि गरीबों के हित में बनी सरकारी योजना का पलीता कैसे लग रहा है।