
जांजगीर-चांपा. प्रशासन की दरियादिली की वजह से जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक आबाद है। ऐसे डॉक्टर मरीजों को धीमा जहर दे रहे हैं और लोगों की असमय जान जा रही है।
हालांकि इसमें कुछ हद तक जिम्मेदार मरीज भी हैं क्योंकि वे जानबूझकर ऐसे नीम हकीमों के क्लीनिक में इलाज कराने पहुंचते हैं। बीते एक माह के भीतर ऐसे तीन से चार प्रकरण सामने आ गए जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से मरीजों की जान चली गई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पामगढ़ इलाके के जेवरा गांव में केवल एक प्रकरण बनाया है।
सरकार ने भले भी मरीजों की हित को देखते हुए नर्सिंग होम एक्ट लागू कर दिया है, लेकिन अभी भी ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंसकर धीमी जहर के शिकार हो रहे हैं। सस्ती इलाज के फेर में ग्रामीण ऐसे डॉक्टरों के शिकार बन रहे हैं और स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की स्थिति में इलाज के नाम पर बड़े डॉक्टरों से मोटी रकम लुटा रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में आज भी झोलाछाप डॉक्टरों का कारोबार धड़ल्ले से फल फूल रहा है।
ऐसे डॉक्टरों की चपेट में आकर हर रोज भोले भाले मरीजों की जान जा रही है। सरकार ने चार साल पहले नर्सिंग होम एक्ट लागू किया है। एक्ट के तहत एमबीबीएस डॉक्टर को छोड़कर इससे छोटी डिग्री रखने वाले डॉक्टर क्लीनिक खोलकर इलाज नहीं कर सकेंगे। यहां तक कि एमबीबीएस डॉक्टर भी बिना पंजीयन के अब क्लीनिक का संचालन नहीं कर सकता। जिसमें सरकारी डॉक्टर भी दायरे में आते हैं।
इसके बावजूद ग्रामीण अंचलों में झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानदारी बंद नहीं हो रही है। यहां तक कि इन डॉक्टरों को यह भी जानकारी नहीं है कि नर्सिंग होम एक्ट क्या है। जद तो तब हो जा रही है जब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इस पेशे पर वॉट लगाने वालों पर नकेल नहीं कसा जा रहा है। गांव गांव से लेकर कस्बों में एक नहीं कई ऐसी दुकानें हैं जहां सुबह से लेकर शाम तब मरीजों की भीड़ लगी होती है। कोई बेरोजगार किसी अच्छे डॉक्टर के क्लीनिक में कुछ दिन काम किया, वह उसी डॉक्टर की तरह विशेषज्ञ बन जाता है और खुद क्लीनिक खोलकर लाखों की कमाई करना शुरू कर देता है। बीते एक माह से ऐसे डॉक्टरों के चंगुल में तीन से चार लोगों की जान जाने की शिकायत मिल रही है।
बम्हनीडीह क्षेत्र के ग्राम सरवानी में एक मरीज की मौत हुई थी। तो वहीं बिर्रा में भी एक मरीज की मौत की शिकायत मिली थी। इसी तरह गुरुवार की शाम को भी नैला में एक बच्चे की मौत हुई थी। नैला वाले प्रकरण में जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद साफ कहा है कि गलत इलाज की वजह से मासूम की मौत हुई है।
बंगाल व ओडिशा की डिग्री
शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में अभिभावक लाखों लुटा देते हैं। ग्रामीण अंचलों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों की फर्जी डिग्री लेकर झोलाछाप डॉक्टर अपना कारोबार फैलाए हुए हैं और भोलेभाले लोगों को चूना लगा रहे हैं। जबकि नियम के मुताबिक जिस राज्य में कोई डॉक्टर पे्रक्टिस कर रहा है उसी राज्य का मेडिकल काउंसिल में पंजीयन होना चाहिए।
अधिकारियों को शिकायत का इंतजार
झोलाछाप डॉक्टरों से शिकायत करने पर अधिकारियों द्वारा जो दलील दी जाती है वह चौकाने वाला होता है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक शिकायत नहीं मिलती ऐसे क्लीनिक में छापेमारी नहीं की जा सकती। वहीं शिकायत के बाद भी संबंधित क्षेत्र के नोडल अफसरों द्वारा कार्रवाई के नाम पर हीला हवाला किया जाता है। कई डॉक्टरों द्वारा ऐसे डॉक्टरों से बाकायदा महीना भी लिया जाता है। इसके चलते ऐसे नीम हकीमों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। अलबत्ता ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों का कारोबार धड़ल्ले से चलता है।