जांजगीर चंपा

परिजन थोड़ी सी जागरूकता दिखाते तो आज उनका बेटा उनके साथ होता

थोड़ी सी सावधानी बरतें तो शायद यह दर्द हमें न झेलना पड़े
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थोड़ी सी सावधानी बरतें तो शायद यह दर्द हमें न झेलना पड़े
थोड़ी सी सावधानी बरतें तो शायद यह दर्द हमें न झेलना पड़े

जांजगीर-चांपा. किसी माता पिता से उनकी संतान, किसी का भाई या बहन उनकी आंखों के सामने मर जाए तो उसका दर्द शायद ही कोई बता सके। ऐसा ही असहनीय दर्द सड़क दुर्घटना में रोजाना मरने वाले हजारों लोगों के परिजन झेलते हैं। यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरतें तो शायद यह दर्द हमें न झेलना पड़े। कुछ ऐसी ही आपबीती पत्रिका सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान आपके सामने ला रहा है।


पहली कहानी में हम बात कर रहे हैं, शहर के बजरंगी पारा निवासी चंद्र प्रकाश यादव के घर की। उनका 16 वर्षीय बेटा प्रशांत दो महीने पहले ही सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। प्रशांत चार फरवरी की सुबह 9 बजे अपने सबसे बड़े भाई अमर को नैला रेलवे स्टेशन छोडऩे गया था।

वापस वह बाइक से घर आ रहा था कि तभी सामने से आए एक ट्रेलर चालक ने उसे रौंद दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जब पत्रिका ने प्रशांत की मां उषा यादव से उस घटना के बारे में बात की उनकी आंखे छलक उठीं। उन्होंने बताया कि उनके तीनों बेटों का जन्मदिन फरवरी महीने में है।

दो फरवरी को घर वालों ने प्रशांत का जन्मदिन धूमधाम से मनाया और कुछ दिन बाद ही दो अन्य भाइयों का जन्म दिन मनाने वाले थे, लेकिन चार फरवरी को उनकी एक छोटी सी लापरवही ने उन खुशियों को मातम में बदल दिया। भले ही प्रशांत के घर वाले इस सड़क दुर्घटना के लिए ट्रक चालक को जिम्मेदार मानें, लेकिन कहीं न कहीं इसके लिए वह भी जिम्मेदार हैं। यदि उन्होंने अपने बेटे को 18 साल से पहले बाइक चलाने के लिए मना किया होता तो आज वह उनके साथ हंस खेल रहा होता।


ट्रक चालक की बताई जा रही गलती
मृतक प्रशांत की मां उषा यादव का कहना है कि उसके बेटे की जान ट्रक चालक की गलती से गई थी। उनका आरोप है कि जांच में पाया गया था कि ट्रक चालक शराब पीकर गाड़ी चला रहा था। ट्रैफिक सुरक्षा नियमों की बात करें तो शराब पीकर वाहन चलाना अपराध है। इसमें सजा का प्रावधान है, लेकिन ज्यादातर चार पहिया व बड़े वाहन चालक इस नियम की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आते हैं। इसमें हमारी ट्रैफिक पुलिस की भी उतनी ही गलती है। उनकी आंखों के सामने नाबालिग फर्राटे भरते चलते हैं, लेकिन पुलिस ध्यान नहीं देती। इतना ही नहीं कभी भी ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चालकों की एल्कोहल जांच नहीं की जा रही है।


सभी समझे अपनी जिम्मेदारी
सड़क दुर्घटना के लिए कोई एक जिम्मेदार है यह कहना गलत होगा। इसके लिए जितना जिम्मेदार आरोपी और पीडि़त पक्ष होता है उतना ही जिम्मेदार पुलिस व प्रशासन का वह सिस्टम भी होता है, जिसकी जिम्मेदारी होती है कि वह इसका पालन कराए और ऐसा न करने वाले पर सख्ती बरते। वो व्यापारी भी उतने ही जिम्मेदार हैं, जो कि सड़क किनारे तक अतिक्रमण कर देते हैं।

Published on:
25 Apr 2018 02:47 pm
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