जांजगीर चंपा

#topic of the day : प्रकृति से जुडऩे पर मिलता है बेहद सुकून

पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में पर्यावरणविद व फोटोग्राफर धर्मेंद्र राणा उपस्थित हुए।

2 min read
topic of the day in janjgir
पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में पर्यावरणविद व फोटोग्राफर धर्मेंद्र राणा उपस्थित हुए।

जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में पर्यावरणविद व फोटोग्राफर धर्मेंद्र राणा उपस्थित हुए। उन्होंने प्रकृति के बीच रहने व उससे मिलने वाले सुकून के बारे में बताया। उन्होंने प्रकृति से जुड़े रहने सभी से आग्रह करते हुए बताया कि इससे पर्यावरण संरक्षित करने सहयोग मिलता है।

प्रकृति प्रेमी राणा ने जिले में अन्य देशों से आने वाले पक्षियों के बारे में खुलकर बातें की। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय के आसपास ही सरखों, घाठाद्वारी सहित हसौद क्षेत्र में बहुतायत से पक्षियों का आना-जाना लगा रहता है। खासकर सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों की पक्षियां अपने अनुकूल माहौल खोजते हुए यहां पहुंचती हैं।

कुछ वर्षों पहले तक यहां हजारों की तादाद में पक्षियों का आना होता था और उनकी कलरव सुनने लोग पहुंचते भी थे, लेकिन जब से उन पक्षियों का शिकार करना लोगों ने शुरू किया, तब से पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। इन प्रवेशी पक्षियों को लेकर लोगों के साथ शासन-प्रशासन को जागरूक होने की आवश्यकता है।

इन पक्षियों को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रवेशी पक्षियां कई स्थानों पर चार से छह माह तक रहती हैं। इन पक्षियों को संरक्षित करने लोगों को जागरूक करने के साथ प्रशासन को भी इस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

साथ ही प्रवेशी पक्षियों के लिए संबंधित जगहों पर पौधरोपण कर व शांत माहौल बनाकर अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने वाइल्ड लाइफ प्रेमी लोगों से कहा कि इस क्षेत्र में परेशानियां तो आती है, लेकिन उससे जूझने का माद्दा रख आगे बढ़ा जा सकता है।


गाइड बन कर सकते हैं कमाई
फोटोग्राफर राणा का मानना है कि केवल फोटोग्राफी से पर्याप्त कमाई नहीं किया जा सकता। फोटोग्राफी का शौक पूरा करना होगा तो लोगों को समानांतर कार्य का चयन करना होगा। उन्होंने बताया कि इस दिशा में गाइड का काम कर भी कमाई किया जा सकता है। आजकल भगमभाग भरे जीवन में लोग दो पल चैन का ढूंढते हैं, जो जंगलों की सैर कर मिल सकती है। जंगलों की सैर की दिशा में लोगों का रुझान भी बढ़ा है।


प्यार भरे माहौल की जरुरत
पर्यावरणविद राणा ने ग्राम भड़ेसर के अजगर संरक्षण को याद करते हुए बताया कि जब हम पशुओं को छेड़ेंगे तभी वे हम पर हमला करेंगे। उनसे प्यार भरे संरक्षित माहौल में व्यवहार करें, तो वे कभी हमें नुकसान नहीं कर सकते। इसके लिए उन्होंने जिला मुख्यालय के समीप ग्राम भड़ेसर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां के एक किसान के घर बरगद के वृक्ष पर सैकड़ों की तादाद में अजगर पल रहे हैं, जिन्होंने आज तक उस परिवार को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया।

Updated on:
28 Feb 2018 07:56 pm
Published on:
28 Feb 2018 07:54 pm