
Lilagar River bridge: जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़-शिवरीनारायण क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन से जुड़ी बड़ी सौगात मिली है। बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग पर मस्तूरी से मुलमुला के बीच लीलागर नदी के कुटीघाट में 8 करोड़ 31 लाख 83 हजार रुपए की लागत से उच्चस्तरीय पुल और पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा। राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को इसके लिए 831.83 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दे दी है। इस पुल के निर्माण से पामगढ़, शिवरीनारायण सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। खासकर बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण आवागमन प्रभावित होने की समस्या से लोगों को राहत मिल सकेगी।
कुटीघाट में लीलागर नदी पर हाईलेवल ब्रिज के निर्माण के प्रस्ताव को वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया गया था। अब शासन की ओर से इसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। पुल के साथ पहुंच मार्ग का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे मुख्य मार्ग से पुल तक वाहनों की आवाजाही सुगम हो सके।
लीलागर नदी में बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने से नदी क्षेत्र में आवागमन प्रभावित होता है। मौजूदा व्यवस्था के कारण आसपास के ग्रामीणों को बारिश के दिनों में आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाईलेवल ब्रिज बनने के बाद नदी में पानी बढ़ने की स्थिति में भी सड़क संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी।
इस पुल का सबसे बड़ा लाभ पामगढ़-शिवरीनारायण क्षेत्र के लोगों के साथ आसपास के गांवों को मिलेगा। बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग पर यह मार्ग महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करता है। पुल बनने से लोगों को आवागमन के लिए बेहतर और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होगा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों के अलावा रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी सुविधा मिलेगी। पुल के निर्माण से क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राज्य शासन ने इस परियोजना के लिए कुल 8 करोड़ 31 लाख 83 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। इसमें लीलागर नदी पर उच्चस्तरीय पुल के साथ पहुंच मार्ग का निर्माण भी शामिल है। अब PWD विभाग द्वारा आगे की निर्माण प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। हाईलेवल ब्रिज बनने के बाद बारिश के दौरान नदी में पानी बढ़ने से होने वाली आवाजाही की समस्या कम होगी और पामगढ़-शिवरीनारायण क्षेत्र को सालभर बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिल सकेगी।