जैजैपुर शिक्षा कर्मी भर्ती वर्ष 2005 और 2008 में हुआ था। तत्कालीन समय में शिक्षाकर्मी भर्ती में जमकर धांधली किया गया था।
जैजैपुर. शिक्षाकर्मियों की संविलियन के बाद से ही जैजैपुर जनपद के अंतर्गत कार्य करने वाले शिक्षकों की नींद उड़ी हुई थी और फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों को अपने ऊपर कार्यवाही होने का डर सता रहा था। जैजैपुर शिक्षा कर्मी भर्ती वर्ष 2005 और 2008 में हुआ था। तत्कालीन समय में शिक्षाकर्मी भर्ती में जमकर धांधली किया गया था। बहुत से ऐसे लोग है जिन्होंने फर्जी डिग्री के बदौलत ही नौकरी हासिल कर ली थी। इसका सबसे बड़ा सबूत शिक्षा कर्मीभर्ती का मूल दस्तावेज जैजैपुर जनपद पंचायत में नहीं होना है, जबकी मूल दस्तावेज शिक्षकों के सेवा पुस्तिका में संलग्न है।
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संविलियन घोषणा होने के बाद फर्जी डिग्री से नौकरी करने वालो की चिंता सता रही थी। जिसे बचाने के लिए बीते दो वर्ष से जैजैपुर बीईओ कार्यालय में पदस्थ बाबू को बिना किसी शिकायत के बाद भी तत्काल हटाकर जैजैपुर बीईओ के द्वारा सहायक खंड शिक्षा अधिकारी के नेत्तृत्व में 14 सदस्यी टीम बनाकर उनके देख रेख में बीईओ कार्यलय में ही सेवा पुस्तिका का संधारण किए जाने का निर्देश दिया गया। वही दूसरी ओर बीईओ द्वारा मौखिक रूप से आदेश देते हुवे संकुल प्रभारियों को अपने अपने संकुल में सेवा पुस्तिका ले जाकर संधारण कार्य निष्पादन की बात कही। अब प्रश्न यह उठता है कि कौन से आदेश पर अमल किया जाए। कहीं सेवा पुस्तिका संधारण में फर्जी शिक्षकों को बचाने के लिए ये पूरा खेल तो नहीं खेला जा रहा है जो जांच का विषय है।
क्या है सेवा पुस्तिका
शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक शिक्षिकाओं का मूल दस्तावेज के कापी के साथ ही उनके नियुक्ति संबंधित जानकारी सहित तमाम जानकारी रहती है, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण जानकारी रखने वाले सेवा पुस्तिका यदि गुम हो जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। जबकि बीईओ के द्वारा 14 सदस्यी गठित टीम को यह भी जानकारी नहीं है कि सेवा पुस्तिका का संकुल स्तर पर संधारण करने मौखिक आदेश दे दिया गया है। जिसका काम संकुल स्तर पर कराने की बात कुछ शिक्षकों द्वारा कही जा रही है। बेधड़क कार्यालय से सेवा पुस्तिका निकालकर अपने अपने हाथों में लेकर घूम रहे है।
कहीं दस्तावेज बदलने की साजिश तो नहीं
जिस तरह की लापरवाही आज बीईओ कार्यलय में देखने को मिली। जहां शिक्षक बिना किसी रोक टोक के सेवा पुस्तिका को पकड़ कर घूम रहे थे। उसे देखकर तो यही लगता है कि विभाग किसी तरह की बड़ी गलतियों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि सेवा पुस्तिका में विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की पूरी कुंडली मौजूद होती है। ऐसे में यदि किसी ब्यक्ति को उसका सेवा पुस्तिका आसानी से मिल जाता है। तो ऐसे में उसमे मौजूद दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ किया जा सकता है, लेकिन जैजैपुर बीईओ के द्वारा इस तरह की लापरवाही समझ से परे है। साथ ही कई तरह की आशंकाओं को बल भी देता है। जबकि जैजैपुर शिक्षा विभाग में आज लगभग 1400 के करीब शिक्षक शिक्षिकाएं कार्यरत है। किसी के द्वारा दुर्भावनावश भी किसी की सेवा पुस्तिका इधर उधर कर दिया जाता है। तो उन शिक्षकों का क्या होगा वही समझ सकते है।