
जांजगीर-चांपा. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के सपनों में पानी फेरने में जिले के स्वास्थ्य अफसर कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना के तहत जिले में ऐसे कई अस्पतालों को हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर खोलकर लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराने जी जान लगा दिया हैं, लेकिन ऐसे सेंटरों को जिले केसीएमएचओ अब तक शुरू नहीं करा पाए हैं। जबकि दो माह पहले आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत देश भर में हो चुकी। बल्कि घोर नक्सली क्षेत्र के अस्पताल काम करना शुरू भी कर दिया है, लेकिन मैदानी क्षेत्र के अस्पतालों में अब भी बदहाली छाई हुई है।
सबसे बदतर स्थिति कहीं और नहीं बल्कि जिला मुख्यालय में ही है। जिला मुख्यालय के नैला में दो माह पहले हेल्थ एवं वैलनेस सेंटर खोला जाना है। बाकायदा इसके लिए भवन बनकर तैयार भी हो चुका है। इतना ही नहीं अस्पताल के लिए बाकायदा स्टॉफ की नियुक्ति भी कर दी गई है, लेकिन आज तक अस्पताल शुरू नहीं हो सका है। इसके पीछे सीएमएचओ की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाया जा रहा है। अलबत्ता नैला क्षेत्र के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है।
यहां के मरीज अस्पताल को देखकर आस लगाए बैठे रहते हैं कि कब अस्पताल शुरू हो और इसका लाभ लें। नैला के मरीजों का कहना है कि इस क्षेत्र में न तो कोई निजी क्लीनिक है और न ही सरकारी अस्पताल। नैला क्षेत्र के मरीजों को सीधे तीन किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। यदि यह अस्पताल शुरू हो जाता तो निश्चित ही मरीजों को इसका लाभ मिलता।
यह हो रही दिक्कत
नैला के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की बिल्डिंग चार माह पहले बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन भवन में कुछ कमियां रह गई है। भवन के सामने साफ -सफाई का अभाव है। भवन के हैंडओवर को लेकर पीएचई व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों में कुछ पेंच फंस गया था, जिसे सीएमएचओ अब तक नहीं सुलझा पाए हैं। इसके चलते स्वास्थ्य केंद्र अब तक शुरू नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि भवन के सामने कुछ लोगों ने रेत, गिट्टी सहित अन्य सामान रख दिया है। इसके चलते स्वास्थ्य केंद्र शुरू नहीं हो पा रहा है। जानकारों के अनुसार यह छोटी समस्या है। यदि स्वास्थ्य केंद्र शुरू कर दिया जाए तो खुद ब खुद साफ सफाई हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि अस्पताल शुरू करने के लिए जिम्मेदार अफसरों के कार्यकुशलता का अभाव बताया जा रहा है। यदि स्वास्थ्य अफसर जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करे तो स्वास्थ्य केंद्र शुरू हो सकता है।
30 जून को हो चुकी है पोस्टिंग
बताया जा रहा है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के सीएमएचओ विभिन्न कर्मचारियों की नियुक्ति 30 जून को कर चुके हैं। बाकायदा कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान अटैच किया गया है, लेकिन कर्मचारी अब भी अपने पूर्व स्थानों में कार्य कर रहे हैं। कर्मचारी पेंडुलम की तरह बन गए हैं। जबकि किसी भी सूरत में 15 अगस्त तक आयुष्मान भारत योजना के अस्पतालों को शुरू करना था। वहीं एक सितंबर की स्थिति में भी गर्त में है। हालात को देखकर ऐसा नहीं लग रहा है कि अब भी दो चार माह के भीतर स्वास्थ्य केंद्र शुरू हो पाएगा।
-आयुस्मान भारत योजना के तहत बनाए गए अस्पतालों में कुछ कमियां रह गई है, जिसे दूर कर बहुत जल्द शुरू किया जाएगा। कई स्थानों में कुछ विवाद था, जिसे दूर किया जा रहा है- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ