
जांजगीर-चांपा. जिले में नाबालिगों के गुमने के आंकड़े कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिले के 18 थानों से अब भी 68 गुम नाबालिगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। जिन्हें ढूंढने के लिए चार टीम प्रदेश के बाहर गई हुई है। गुमशुदगी के मामले में अधिकतर संख्या प्रेम प्रसंग के हैं जो 16 से 17 साल के बीच के नाबालिग जोड़े हैं जो घर से निकलकर अज्ञात वास में हैं। अधिकतर मामलों में ऐसे जोड़े हैं जो जम्मू कश्मीर में गए हैं। प्रेम प्रसंग के चक्कर में घर से निकल गए हैं पर परिजनों के डर से अपने परिचितों के डर से जम्मू कश्मीर के ईंठ भ_े जैसे ठिकानों में गुजर बसर कर रहे हैं।
गुम नाबालिगों की तलाश के लिए छत्तीसगुढ़ पुलिस ने आपरेशन तलाश योजना की शुरूआत की है। पहले इस योजना का नाम आपरेशन मुस्कान था। जिसे बदलकर आपरेशन तलाश योजना रखा गया है। योजना के तहत गुम नाबालिग बच्चों की तलाश करनी है। बीते माह आई पुरूषोत्तम गौतम ने जांजगीर में योजना की औपचारिक शुभारंभ किया था। हालांकि यह योजना प्रदेश स्तर की है। जिसका शुभारंभ किया गया है।
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इस योजना के तहत वर्तमान में जिले के 18 थानों में 68 मामले पंजीबद्ध किए गए हैं। जिसमें नाबालिग किसी कारणों से घर से निकल गए हैं। कोई प्रेम प्रसंग के चलते अपनी प्रेमिकाओं के साथ निकल गया है तो कोई दिमागी रूप से कमजोर होने के कारण लापता है। योजना का बेसिक लक्ष्य मासूम बच्चों की तलाशी के लिए बनाया गया है, जो अपने मां-बाप से बिछड़ गया है, लेकिन योजना में ऐसे वर्ग के बच्चों को भी शामिल किया गया है जो 18 साल से कम हैं।
वर्तमान में जो आंकड़े यानी 68 मामले दर्ज हैं जिसमें 15 से 17 वर्ष के नाबालिग जोड़े अधिक शामिल है। जो प्रेम प्रसंग के चक्कर में अपने मां-बाप को धोखा देकर निकल गए हैं। ऐसे लोगों की तलाश करना पुलिस के लिए चुनौती बन जाती है। लड़की का तो कुछ नहीं बिगड़ता, लेकिन अपहरण करने वाले नाबालिग के खिलाफ धारा 363 का अपराध पंजीबद्ध हो चुका होता है। जिसके कारण उसे पुलिस व कोर्ट का चक्कर काटना पड़ता है।
अधिकतर जोड़े जम्मू कश्मीर में
इसे शिक्षा की कमी कहें या नादानी। पुलिस के मुताबिक अधिकतर नाबालिग ऐसे होते हैं जिन्हें कम उम्र में प्यार हो जाता है और प्रेम प्रसंग के चक्कर में सीधे गुमनाम ठिकानों में गुजर बसर करते हैं। ऐसे लोगों के परिजन थाने में रिपोर्ट लिखाकर पुलिस पर दबाव बनाती है। इनका मोबाइल लोकेशन मिलने के बाद ऐसे लोगों के ठिकाने तक पुलिस पहुंचती है। ऐसे जोड़ों का मोबाइल लोकेशन जम्मू कश्मीर में अधिक बताता है। क्योंकि जम्मू कश्मीर में छत्तीसगढ़ के जांजगीर व बिलासपुर जिले के लोग अधिक रहते हैं। इन्हीं के शरणगाह में जोड़े अधिक पाए जाते हैं।
प्रदेश में अव्वल जांजगीर
गुम बालक बालिकओं के मामले में छत्तीसगढ़ में जांजगीर जिले का नाम टॉप पर है। यहां वर्तमान में 68 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं दूसरे क्रम में रायपुर जिले में 60 गुमशुदगी के मामले दर्ज है। तीसरे क्रम में बिलासपुर जिले का नाम है। इस जिले में 52 मामले पंजीबद्ध है। हालांकि यह आंकड़ा घटते बढ़ते रहता है। इसी तरह जांजगीर पुलिस ने बीते एक माह के भीतर 35 गुम नाबालिगों को ढूंढ भी निकाला है। जानकारी के मुताबिक पीएचक्यू से साफ अल्टीमेटम मिला है कि आंकड़ों में कमी लाना है।