-शिक्षाकर्मियों के शोषण को देखते ही हुए शालेय शिक्षाकर्मी संघ का गठन किया गया, जिससे शासन से अपनी मांगों को लेकर वह लड़ाई लड़ सकें
टॉपिक ऑफ द डे
जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट कॉम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे कार्यक्रम में शुक्रवार को पत्रिका कार्यालय में शालेय शिक्षाकर्मी संघ के जिलाध्यक्ष संतोष शुक्ला उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि जिस तरह शिक्षाकर्मी अटूट मेहनत करके देश का भविष्य तैयार कर रहे हैं, उस तरह उन्हें शासन से सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। शासन द्वारा शिक्षाकर्मियों को बंधुआ मजदूर बनाकर छोड़ दिया गया है, जो रोज सुबह नौकरी के लिए निकलता है पूरी मेहनत से बच्चों को पढ़ाता है और महीने के अंत में उसके पास इतने पैसे भी नहीं रहते कि वह अपने ही बच्चे की कोई इच्छा पूरा कर सके।
उन्होंने बताया कि उनकी मांगों को मानने की जगह शासन ने उन्हें और परेशान कर रही हैं। उन्हें न तो ग्रेज्युटी का लाभ दिया जा रहा है और न मेडिकल लाभ। जबकि वहीं शासकीय शिक्षकों को अन्य सारे लाभ के साथ ही सातवें वेतनमान का लाभ भी दिया जा रहा है। संतोष शुक्ला ने बताया कि शिक्षाकर्मी शिक्षा विभाग की नींव बन चुके हैं, लेकिन सरकार उसी नींव को कमजोर करने में लगी हुई है।
उन्होंने बताया कि शिक्षाकर्मियों के शोषण को देखते ही हुए शालेय शिक्षाकर्मी संघ का गठन किया गया, जिससे शासन से अपनी मांगों को लेकर वह लड़ाई लड़ सकें और शिक्षाकर्मियों को संविलियन दिला सकें। यह लड़ाई कब पूरी होगी इसके बारे में शुक्ला कुछ नहीं बता सके, लेकिन उनका दावा है कि उनकी यह लड़ाई तब तक चलती रहेगी, जब तक कि उनकी मांगों को माना नहीं जाता है।
छात्रों का भविष्य सबसे पहले
संतोष शुक्ला ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर शासन से मांग करना और लड़ाई लडऩा कहीं से भी गलत नहीं है। हालांकि उसमें छात्र हित बाधित नहीं होना चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में सभी शिक्षाकर्मियों से मांग की है कि वह छात्र हित को देखकर कार्य करें और ड्यूटी के दौरान अपनी व्यथा को भूलकर पूरे हिम्मत व जोश के साथ कार्य करें। बच्चों को बेहतर शिक्षा दें। यही बच्चे कल का भविष्य हैं और जब भविष्य अच्छा होगा तो वर्तमान अपने आप अच्छा हो जाएगा।