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Breaking : पान-गुटखा खपाने ग्राहक तलाश रहे थे ये नाबालिग, ग्राहक बन कर पहुंची पुलिस, बड़ी मात्रा में चोरी का सामान जब्त

पुलिस ने चोरी की गुत्थी सुलझाते हुए तीन नाबालिगों से बड़ी मात्रा में चोरी का सामान जब्त किया है।

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Breaking : पान-गुटखा खपाने ग्राहक तलाश रहे थे ये नाबालिग, ग्राहक बन कर पहुंची पुलिस, बड़ी मात्रा में चोरी का सामान जब्त

जांजगीर-चांपा. शहर में सिलसिलेवार चोरी की वारदात को अंजाम देने में किसी और का नहीं बल्कि नाबालिग बच्चों का हाथ होने की पुष्टि हो रही है। जिला मुख्यालय में बीते दिवस तीन-चार दुकानों का ताला टूटा। एक पान ठेले से तकरीबन 25.30 हजार रुपए की चोरी हुई थी। जिसमें चोरी की वारदात को अंजाम देने में तीन नाबालिग बच्चों का हाथ था। पुलिस ने चोरी की गुत्थी सुलझाते हुए तीन नाबालिगों से बड़ी मात्रा में चोरी का सामान जब्त किया है। पुलिस ने नाबालिगों को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है।

24 अप्रैल को सियाराम के पान ठेले से अज्ञात चोरों ने पान गुटखा का सामान, पाउच, सिगरेट बीड़ी समेत तकरीबन 25 हजार का माल पार कर दिया था। इसके अलावा अन्य दो तीन दुकानों का भी ताला टूटा था। बीच शहर में हुई चोरी को देखते हुए कोतवाली पुलिस हरकत में आई थी। चोरी की गुत्थी सुलझाने एसपी नीतु कमल ने टीम गठित की थी। टीम को सफलता मिल गई और मुखबिर के बताए हुए हुलिए को देखते हुए तीन नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

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दरअसल नाबालिग पान गुटखा को खपाने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे थे। पुलिस ग्राहक बनकर उन तक पहुंची और उन्हें अपने कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू की, तब नाबालिगों ने चोरी स्वीकार करते हुए आपबीती कहानी बयां कर दी। पुलिस ने नाबालिग बच्चों से चोरी के सारे सामान नगदी 200 रुपए जब्त कर लिया गया है। तीन अपचारी बालकों को पुलिस ने बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है। एक अपचारी बालक पुलिस को चकमा देकर भाग निकला है।

हो सकता है परिजनों का हाथ
अपचारी बालकों को चोरी के लिए मजबूर करने में अभिभावकों का हाथ होना बताया जा रहा है। दरअसल गरीबी व भूख के आड़ में बच्चे खान-पान के लिए भटकते रहते हैं। परिजन उन्हें भीख मांगने के लिए भी मजबूर करते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे भीख मांगने के बजाए चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं। ऐसे अभिभावकों की गतिविधि भी संदिग्ध होते हैं। क्योंकि वे रात को बच्चे घर छोड़कर बाहर घूमते हैं, लेकिन उनके पालकों द्वारा उन्हें मना नहीं किया जाता। जिसके चलते बच्चे चोरी की वारदात को अंजाम देने उतर आते हैं।