जांजगीर चंपा

#Topic Of The Day- झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पैसों के साथ शरीर का भी नुकसान

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर डॉक्टर से मिलें और समुचित इलाज कराकर स्वस्थ्य रहें।
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#Topic Of The Day- झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पैसों के साथ शरीर का भी नुकसान

टॉपिक ऑफ द डे
जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट कॉम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में स्वास्थ्य विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी आरएस परौहा उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि झोलाछाप डॉक्टर जिनका गांवों में जाल फैला हुआ है, उनसे इलाज कराना मतलब अपने पैसों के साथ स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना है। उन्होंने लोगों को सलाह दिया कि अपने आसपास के सरकारी या निजी चिकित्सालयों में ही प्रशिक्षित डॉक्टरों से इलाज कराएं।

ग्रामीणों को जानकारी देते हुए परौहा ने बताया कि आज भी गांवों में इलाज को लेकर लोगों के बीच कई भ्रांतियां हैं, जिसके कारण वे इलाज कराने अस्पताल नहीं जाते। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर डॉक्टर से मिलें और समुचित इलाज कराकर स्वस्थ्य रहें। लोगों के स्वास्थ्य के लिए सरकार भी जगह-जगह अस्पताल खोलकर लोगों को सुविधा उपलब्ध करा रही है, जिसका लाभ उठाएं। उनका मानना रहा कि शरीर में होने वाले विकारों को छुपाने से मर्ज बढ़ते जाता है और ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

बेझिझक डॉक्टरों के पास जाकर अपना मर्ज बताकर उनके बताए अनुसार उपचार करें। साथ ही गांवों में घूमने वाले अप्रशिक्षित झोलाछाप डॉक्टरों से बचने की सलाह देते हुए बताया कि उनका इलाज तत्कालीक तौर पर ठीक हो सकता है, लेकिन नुकसानदेह साबित होता है। झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने वाले लगभग सभी को देर सवेर मर्ज बढऩे पर अच्छे डॉक्टर के पास जाना पड़ता है, जिससे पैसों का भी खर्च बढ़ता है। शरीर रोग मुक्त नहीं हो पाता वह अलग है।

इस तरह परेशानियों से बचने के लिए लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने आयुर्वेद को सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा कि आज सरकार भी इसके प्रचार-प्रसार में लगी है और लोगों का रूझान भी इस दिशा में बढ़ा है। आयुर्वेद पद्धति से इलाज कराने पर रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। इसी तरह गांवों की महिलाओं को भी घर में जचकी कराने के बजाए पास के सरकारी अस्पताल जाने की सलाह जाने देते हुए बताया कि उनकी जचकी के लिए सरकार कई योजना चला रही हैए जिसमें पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क होने के साथ महिलाओं को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।

दवा का डोज पूरा लें
लोगों को दवा आधा-अधूरा खाने व बीच में नहीं छोडऩे की सलाह देते हुए परौहा ने बताया कि दवा का डोज पूरा करना चाहिए। डॉक्टर किसी दवा को पांच दिनों के लिए लिखते हैं, तो उसे पूरा पांच दिन खाना चाहिए। दो दिन दवा खाने पर ठीक होने की स्थिति निर्मित होती है, लेकिन रोग पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ रहता। पूरा डोज खाने से शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है और रोग समाप्त हो जाता है। इसी तरह उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की लिखी दवा मेडिकल स्टोर्स में नहीं मिलने पर दुकान संचालक द्वारा उसका विकल्प बताया जाता है, जिसे वे सहर्ष सेवन कर सकते हैं। मेडिकल स्टोर्स के संचालक भी दवा के बारे में अच्छी तरह जानते हैं, जो कभी गलत सलाह नहीं दे सकते और यह उनका दायित्व भी है। किसी तरह की शंका की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है।

Published on:
06 Mar 2018 02:16 pm
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