Vedanta Plant Accident Update: वेदांता पावर प्लांट हादसे में एक ओर जहां 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं अब एक मजदूर के लापता होने से रहस्य और गहरा गया है। हादसे के दिन से गायब दिलीप कुमार का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है...
Vedanta Plant Accident: वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद से दिलीप कुमार नामक एक मजदूर अब तक लापता है। हादसे के दिन वह बॉयलर टेस्टिंग के लिए प्लांट के अंदर गया था, लेकिन उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल सका है। गुरुवार को परिजन प्लांट पहुंचे और उसकी खोजबीन में जुटे रहे, लेकिन देर शाम तक भी कोई सुराग नहीं मिला।
लापता मजदूर को लेकर परिजनों में भारी चिंता और आक्रोश है। उनका आरोप है कि प्लांट प्रबंधन इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे स्थिति और संदिग्ध बनती जा रही है। परिजन लगातार प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन अब तक संतोषजनक जानकारी नहीं मिल पाई है। इधर, इस हादसे में पहले ही 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है और 15 से अधिक घायल विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। ऐसे में एक मजदूर का लापता होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
प्रशासन और पुलिस की टीम जहां हादसे की जांच में जुटी हुई है, वहीं लापता मजदूर की तलाश को लेकर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों ने मांग की है कि लापता मजदूर की जल्द से जल्द खोजबीन कर स्थिति स्पष्ट की जाए। यह हादसा पहले ही सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवालों में घिरा हुआ है, और अब लापता मजदूर का मामला प्रबंधन की जिम्मेदारी पर और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट में 20 मजदूरों की मौत के मामले में पुलिस ने घटना के 48 घंटे बाद जिम्मेदारी तय कर दी है। इस मामले में कंपनी के मालिक निदेशक अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ धारा 106-1, 289 और 3-5 बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
एसपी प्रफुल ठाकुर के अनुसार, मुख्य निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि बॉयलर फर्नेस में अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा होने से दबाव तेजी से बढ़ा। इसके चलते निचला पाइप अपनी निर्धारित स्थिति से हट गया, जिससे विस्फोट हुआ। इस हादसे में 20 ठेका कर्मियों की मौत हो गई, जबकि 15 श्रमिकों का रायगढ़, बिलासपुर सहित अन्य अस्पतालों में इलाज जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि वेदांता कंपनी और एनजीएसएन द्वारा मशीनरी व उपकरणों के रखरखाव तथा संचालन संबंधी मानकों का पालन नहीं किया गया। उपकरणों की देखरेख में लापरवाही और संचालन में उपेक्षा के कारण बॉयलर के दबाव में अचानक उतार-चढ़ाव हुआ, जिससे यह हादसा हुआ।
हादसे के बाद भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधि गुरुवार को प्लांट पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संघ ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए और घायलों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। संघ के राष्ट्रीय मंत्री राधेश्याम जायसवाल ने आरोप लगाया कि क्षमता से अधिक बॉयलर संचालन के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना बॉयलर इंस्पेक्टर की अनुमति के लोड कैसे बढ़ाया गया और दोषियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।
घटना के बाद कांग्रेस की 10 सदस्यीय जांच टीम भी गुरुवार को प्लांट पहुंची। पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल के नेतृत्व में टीम ने मौके का निरीक्षण किया। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मंत्री उमेश पटेल भी मौजूद थे। जांच टीम ने प्राथमिक तौर पर प्लांट प्रबंधन की लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया। जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि क्षमता से अधिक बॉयलर संचालन के कारण ही यह दुर्घटना हुई है।
राज्य के उद्योग, श्रम व वाणिज्य मंत्री लखनलाल देवांगन ने गुरुवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कलेक्टर अमृत विकास टोपनो, एसपी प्रफुल ठाकुर और वेदांता प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बैठक लेकर मामले की गहन जांच के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी पारदर्शिता व गंभीरता से की जाएगी। उन्होंने प्रभावित परिवारों को मुआवजा, रोजगार और जरूरत पड़ने पर पेंशन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
मंत्री देवांगन ने रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, एपेक्स, मेट्रो और जिंदल-फोर्टिस अस्पताल पहुंचकर इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि कंपनी के मुआवजे के अलावा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सहायता राशि भी पीड़ितों को दी जाएगी और घायलों का उपचार पूरी तरह स्वस्थ होने तक जारी रहेगा।