
Vedanta Power Plant Protest: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट के बाहर ठेका श्रमिकों ने रोजगार बहाली की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है। करीब 70 श्रमिक प्लांट के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बॉयलर हादसे के बाद 200 से अधिक कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के काम से हटा दिया गया। इससे कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। श्रमिकों ने रोजगार बहाली और उचित मुआवजे की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
श्रमिकों का कहना है कि 14 अप्रैल को प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट के बाद से कामकाज प्रभावित हुआ है। हादसे में 20 से अधिक मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद से ही प्लांट प्रबंधन और श्रमिकों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और प्रभावित परिवारों को राहत देने के बजाय बड़ी संख्या में श्रमिकों को काम से अलग कर दिया गया।
धरने पर बैठे श्रमिकों ने मांग की है कि जिन कर्मचारियों को काम से हटाया गया है, उन्हें तत्काल वापस रखा जाए। साथ ही हादसे से प्रभावित परिवारों और बेरोजगार हुए श्रमिकों को उचित मुआवजा दिया जाए। श्रमिकों का कहना है कि वे वर्षों से प्लांट में कार्यरत हैं और अचानक रोजगार छिन जाने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
एनजीएसएल कंपनी के ठेका श्रमिक प्लांट के गेट नंबर-1 के सामने धरना देकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने नारेबाजी करते हुए प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
14 अप्रैल को हुए बॉयलर विस्फोट ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। हादसे के बाद सुरक्षा मानकों, श्रमिकों की सुरक्षा और मुआवजा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। अब रोजगार से जुड़े मुद्दे सामने आने के बाद एक बार फिर प्लांट प्रबंधन की कार्यप्रणाली चर्चा में आ गई है।
फिलहाल श्रमिकों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इस पूरे मामले में प्लांट प्रबंधन और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। श्रमिकों के आंदोलन ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों और रोजगार संरक्षण जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।