
Vocational Course Books: वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई खानापूर्ति की तरह चल रही है। शिक्षा सत्र के तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन वोकेशनल कोर्स लेकर पढ़ने वाले छात्रों के बस्तों में पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंची हैं। बिना किताबों के ही स्कूलों में पढ़ाई चल रही है। विडंबना यह है कि तिमाही परीक्षा भी निपटने वाली है। यह प्राइमरी-मिडिल की नहीं, बल्कि बोर्ड परीक्षा की पढ़ाई है। ऐसे में यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रही है।
गौरतलब है कि पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों को नौवीं कक्षा से ही रोजगार के क्षेत्र में हुनरमंद बनाने के लिए शासन सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्स संचालित कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले (Janjgir Champa News) में भी 43 हाई और हायर सेकेंडरी सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्स संचालित हो रहा है।
यहां 9वीं से लेकर 12वीं तक 4600 से अधिक विद्यार्थी वोकेशनल कोर्स लेकर आईटी, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, रिटेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे व्यावसायिक विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से ट्रेनर भी रखे गए हैं। मगर किताबों के बिना ट्रेनर भी पिछले सत्र की किताबों और पुराने नोट्स के आधार पर बच्चों को पढ़ाने का दावा कर रहे हैं।
जांजगीर-चांपा जिले के 43 स्कूलों में अलग-अलग प्रकार के 11 ट्रेडों में वोकेशनल कोर्स संचालित हो रहे हैं। इनमें एग्रीकल्चर, बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विस एंड इंश्योरेंस, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, हेल्थकेयर, आईटी, पावर आदि ट्रेड शामिल हैं। हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में नियमित विषयों के विकल्प के रूप में विद्यार्थी एक वोकेशनल विषय ले सकते हैं। 9वीं-10वीं में विद्यार्थी संस्कृत की जगह और 11वीं-12वीं में विद्यार्थी अपने चुने हुए विषय के अतिरिक्त व्यावसायिक विषय लेकर पढ़ सकते हैं।
समग्र शिक्षा के सहायक जिला परियोजना अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि वोकेशनल कोर्स की किताबें राज्य स्तर से आती हैं। वर्तमान शिक्षा सत्र के लिए बीते शनिवार को ही किताबें आई हैं। संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों को सूचना दे दी गई है, वे किताबें लेकर जा रहे हैं। कुल कितनी किताबें आई हैं, यह वितरण के बाद ही स्पष्ट होगा।
पिछले शिक्षा सत्र में जिले का बोर्ड परीक्षा परिणाम खराब रहा था, जिसके चलते जिला पूरे प्रदेश में नीचे से 32वें क्रम पर था। इस बार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग रिजल्ट में सुधार लाने के प्रयास करने का दावा कर रहा है। मगर इसमें कितने सफल होंगे, यह तो परिणाम बताएगा। इस संबंध में डीईओ एमपी सिंह से जानकारी ली गई तो वे यह नहीं बता पाए कि कितने स्कूलों में वोकेशनल कोर्स संचालित हो रहा है। रिजल्ट सुधार पर उनका कहना रहा कि तिमाही परीक्षा के परिणामों के आधार पर रणनीति तैयार की जाएगी।