जांजगीर चंपा

Video- रेफर फार्म में बच्चे की गर्भ में मौत लिखा और भेज दिया सिटी हॉस्पिटल, यहां स्वस्थ बच्चे का हुआ जन्म, आखिर क्या है माजरा, पढि़ए पूरी खबर…

- जिला अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने की जगह यहां के डॉक्टर उसे कमाई का जरिया बना चुके हैं

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रेफर फार्म में बच्चे की गर्भ में मौत लिखा और भेज दिया सिटी हॉस्पिटल, यहां स्वस्थ बच्चे का हुआ जन्म, आखिर क्या है माजरा, पढि़ए पूरी खबर...

जांजगीर-चांपा. बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जिला अस्पताल जांजगीर के डॉक्टर मानवीयता की सारे हदों को पार करते जा रहे हैं। हालत यह है कि डॉक्टर निजी अस्पताल में पेसेंट को रेफर करने की लालच में गर्भस्थ बच्चे को भी मरा बताने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा ही कुछ यहां गत एक सितंबर को पामगढ़ थाना अंतर्गत कुथुर गांव निवासी दिलीप के साथ हुआ।

वह अपनी भाभी सोनबाई को डिलवरी के लिए जिला अस्पताल लाया था। यहां डॉ. ममता जगत ने जांच के बाद महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत होने की बात कहते हुए उसे बिना देरी किए सीधे सिटी हॉस्पिटल जाने को कहा। गरीब परिजन जब वहां पहुंचे तो महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जो कि आज भी अपनी मां के साथ घर पर स्वस्थ है।

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पीडि़ता सोनबाई का कहना है कि डॉक्टर ने गर्भ में ही उसके बच्चे को मरा बताकर उसे कई बार मरने के लिए मजबूर किया। यदि उसे डिलवरी हीं करानी थी तो सीधे यही कह देती कि कहीं और ले जाओ। जबकि डॉ. ममता जगत का कहना है कि महिला यदि और थोड़ी देर करती तो उसकी जान भी खतरे में पड़ सकती थी, इसलिए उन्होंने नजदीक स्थित सिटी हॉस्पिटल ले जाने की बात कही थी। सिटी हॉस्पिटल से किसी भी प्रकार के कमीशन के लेन-देन संबंधी आरोप को उन्होंने सिरे से खारिज किया है।

डॉक्टर उठा रहे मजबूरी का फायदा
जिला अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने की जगह यहां के डॉक्टर उसे कमाई का जरिया बना चुके हैं। हालत यह है कि यहां निजी हॉस्पिटल के संचालक जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टॉफ से सेटिंग करके रखे हैं। इससे जिला अस्पताल के डॉक्टर आने वाले गरीब मरीजों को कोई न कोई बड़ी समस्या बताकर सीधे निजी अस्पताल भेज रहे हैं।

सोनबाई का यह कोई पहला मामला नहीं है यहां रोजाना ऐसी तरह केस को रेफर किया जाता था। कुछ दिन पहले ही 22 सितंबर को डिलवरी के बाद एक नवजात बच्चे को जिला अस्पताल से डॉ. आरके प्रसाद के यहां रेफर किया गया और बच्चे को छोडऩे खुद अस्पताल की नर्स अपनी ड्यूटी छोड़ कर गई थी। जब बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई पर परिजनों ने हंगामा किया तो इस सच्चाई से पर्दा उठा।

-इस केस में जो डॉ. ममता जगत ने फॉलोअप दिया है वह पूरी तरह से सही था। डिलवरी के दौरान बच्चे के पैर बाहर आ चुके थे। डेथ कंफर्म करने के लिए सोनोग्राफी करनी पड़ती है, लेकिन उतना करने का समय नहीं होने से उन्होंने सही कदम उठाया- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ, जांजगीर-चांपा

-जब मुझे अस्पताल ले जाया गया तो डॉ. ममता जगत ने बताया कि बच्चा मर गया है। इसे जल्द से जल्द सिटी हॉस्पीटल ले जाओ, जहां स्वस्थ बच्चा पैदा हुआ है- सोनबाई, पीडि़त मां

-बिना सही जांच के यूं बच्चे को मरा बता देना गलत है। गरीब की मजबूरी का फायदा उठाते हुए डॉक्टर उन्हें निजी अस्पताल रेफर कर ररे हैं- दिलीप, पीडि़ता का देवर

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Published on:
02 Oct 2018 05:05 pm
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