Rape Case: छत्तीसगढ़ का जशपुर जिले में 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी घर में जबरन घुसकर पहले महिला के साथ मारपीट की, फिर जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
Chhattisgarh Rape Case: जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र में 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ दुष्कर्म का सनसनीखेज और मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि, आरोपी ने घर में जबरन घुसकर पहले महिला के साथ मारपीट की, फिर जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
घटना के संबंध में पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना 9 मई की रात की है। पीडि़ता गांव में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम से लौटकर रात करीब 9 बजे अपने घर पहुंची थी। वह घर का दरवाजा बंद कर सोने की तैयारी कर रही थी, तभी आरोपी महिमा प्रकाश मिंज 26, जबरन घर में घुस आया। आरोपी ने महिला के साथ छेड़छाड़ करते हुए मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
घटना के दौरान पीड़िता किसी तरह आरोपी के चंगुल से छूटकर घर से बाहर निकली और शोर मचाया। बाद में उसने घटना की जानकारी आरोपी की बहन और बहनोई को दी। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर 13 मई को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। मामले की कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक राजेश कुमार यादव, आरक्षक अर्जुन बड़ा और नगर सैनिक योगेंद्र यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पीड़िता की शिकायत पर थाना कांसाबेल में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 64-1, 115-2, और 332-बी के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी। मुखबिर और टेक्निकल टीम की मदद से आरोपी के रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र स्थित अपने गृह ग्राम में होने की सूचना मिली। इसके बाद विशेष पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर आरोपी की घेराबंदी की और उसे हिरासत में लेकर जशपुर लाया गया।
छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म के मामले समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। महिलाओं, बच्चियों और बुजुर्गों तक के साथ हो रही घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सख्त पालन, त्वरित न्याय और सामाजिक जागरूकता की भी बेहद जरूरत है।