जौनपुर

पहले की प्रयास में UPSC-CAPF परीक्षा को पास कर गाड़े झंडे! असिस्टेंट कमांडेंट बनी किसान की बेटी

CAPF Assistant Commandant Success Story: पहले की प्रयास में UPSC-CAPF परीक्षा को पास कर किसान की बेटी असिस्टेंट कमांडेंट बनी। पढ़िए उनकी सफलता की कहानी।

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Jan 07, 2026
किसान की बेटी की सफलता की कहानी। फोटो सोर्स-IANS

CAPF Assistant Commandant Success Story: जौनपुर के एक साधारण किसान परिवार में जन्मी पूजा सिंह ने अपनी मेहनत से सफलता हासिल की। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से बड़ा मुकाम हासिल किया है। पूजा का मानना है कि इस योजना ने उनके सपनों को राह दी। जो उनके जैसे युवाओं के लिए पहले एक कठिन सपना था, आज उनकी उपलब्धि उनके परिवार के लिए गौरव की बात है।

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गांव का नाम रोशन किया

बचपन से ही पूजा ने अभावों का जीवन बहुत करीब से देखा है। इन परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर नहीं बनाया,बल्कि इसने उनकी इच्छाशक्ति को और ज्यादा सशक्त बना दिया। उन्होंने तय कर लिया था कि शिक्षा के माध्यम से वह ना केवल अपना भविष्य बनाएंगी , बल्कि वह अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन करेंगी।

पूजा सिंह की सफलता की कहानी

पूजा ने दिल्ली से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की थी। आर्थिक दबाव के चलते दिल्ली जैसे महानगर में रहकर आगे की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए संभव नहीं हो सका। ऐसे में पूजा जौनपुर लौट आईं और वहां के टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यह वह दौर था जब आर्थिक सीमाएं पूजा के सपनों में बाधा बन सकती थीं, लेकिन प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उनके लिए संजीवनी साबित हुई है। साल 2024 में पूजा को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के बारे में जानकारी मिली। मई 2024 में उन्होंने आवेदन किया और जून 2024 से वह अभ्युदय योजना के तहत निशुल्क कोचिंग से जुड़ गईं।

निरंतर अभ्यास और तैयारी है जरुरी

यह वही योजना है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों के लिए शुरू किया है। जिससे आर्थिक स्थिति उनकी प्रतिभा के रास्ते में किसी प्रकार की बाधा न बन सके। पूजा कहती हैं कि अभ्युदय योजना के तहत उन्हें अनुभवी शिक्षकों से प्रभावी और अच्छा मार्गदर्शन मिला। नियमित कक्षाएं और निरंतर अभ्यास से उनकी तैयारी को नई दिशा मिली।

निजी कोचिंग की फीस बहुत महंगी

पूजा शाम को कॉलेज के बाद डेढ़ घंटे की कक्षाओं में जाती थीं। शिक्षक विषयों को सरल भाषा में समझाने के साथ-साथ नियमित रिवीजन और नोट्स के माध्यम से विद्यार्थियों की बुनियाद को मजबूत करते थे। पूजा कहती हैं कि उन्हें निजी कोचिंग संस्थान में 1-1.50 लाख रुपए तक का खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए लगभग असंभव था। अभ्युदय योजना ने यह आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त कर दिया। निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने उनमें नया आत्मविश्वास भर दिया और उन्हें अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने का अवसर दिया।

पूजा की मेहनत रंग लाई

अभ्युदय योजना का सहारा मिलने के बाद पूजा की समर्पित तैयारी रंग लाई और उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ (UPSC-CAPF) परीक्षा उत्तीर्ण कर असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल कर लिया। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक ही सीमित नहीं रही, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों की सफलता का भी प्रमाण है। पूजा की इस सफलता से उनके परिवार गांव और पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।

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