BA third year examination: मध्य प्रदेश की झाबुआ कन्या महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। प्रिंसिपल ने कहा- यूनिवर्सिटी से गलत शेड्यूल आ गया था।
BA third year examination: मध्य प्रदेश के झाबुआ स्थित शासकीय कन्या महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा के दौरान एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। परीक्षा के आधार पाठ्यक्रम में दो पेपर डिजिटल अवेयरनेस एंड साइबर सिक्योरिटी और पर्सनालिटी डेवलपमेंट के समय को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई। टाइम टेबल के अनुसार प्रश्न पत्र न दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि प्राचार्य डॉ. दिनेश कटारा ने इन आरोपों को नकारते हुए दावा किया है कि परीक्षा नियमानुसार ही आयोजित की गई थी।
जानकारी के अनुसार, 3 अप्रैल को दोपहर 3 से 4 बजे तक 'डिजिटल अवेयरनेस एंड साइबर सिक्योरिटी' का और 4 से 5 बजे तक 'पर्सनालिटी डेवलपमेंट' का पेपर आयोजित होना था। दोनों ही पेपर 50-50 अंकों के थे और एक ही ओएमआर शीट में उत्तर भरने थे। परंतु कॉलेज प्रशासन द्वारा इन दोनों विषयों के प्रश्नपत्रों को उलटे क्रम में छात्रों को सौंप दिया गया। पहले 'पर्सनालिटी डेवलपमेंट' और फिर 'डिजिटल अवेयरनेस' का पेपर हल करवाया गया।
छात्राओं ने जब इस गड़बड़ी को महसूस किया तो उन्होंने तुरंत प्राचार्य से इसकी शिकायत की, लेकिन उनका कहना था कि परीक्षा निर्धारित नियमों के अनुसार ही करवाई जा रही है। परीक्षा के बाद जब छात्राओं ने अन्य कॉलेजों से संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि पेपरों के समय में अंतर वास्तव में हुआ है।
इस गड़बड़ी के कारण छात्राएं असमंजस में हैं। चूंकि दोनों पेपर के लिए एक ही ओएमआर शीट दी गई थी, जिसमें पहले पेपर के उत्तर 1 से 50 तक और दूसरे के 51 से 100 तक भरने थे, इसलिए उत्तरों का क्रम बिगड़ गया। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि इस तरह की गड़बड़ी की गई है तो मूल्यांकन में भ्रम हो सकता है और परिणाम प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति में यदि सभी फेल होती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
इस मामले को लेकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) ने सफाई दी है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी ने स्पष्ट किया कि यह गलती विद्यार्थियों की नहीं है और न ही इसका असर उनके परिणाम पर डाला जाएगा। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय सॉफ़्टवेयर की सहायता से ओएमआर शीट के उत्तरों को सही क्रम में व्यवस्थित करेगा और उसके बाद मूल्यांकन की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।" उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए कॉलेजों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वहीं, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिनेश कटारा का कहना है कि परीक्षा का संचालन समय सारणी के अनुसार ही किया गया। उन्होंने बताया, "हमने यूनिवर्सिटी द्वारा भेजे गए टाइम टेबल के अनुसार ही प्रश्न पत्र खोले और परीक्षाएं कराईं। पेपर लिफाफे पर जो समय लिखा था, वह गलत हो सकता है, लेकिन हमने टाइम टेबल का पालन किया है।"
डीएवीवी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस गड़बड़ी के कारण किसी भी केंद्र पर दोबारा परीक्षा नहीं कराई जाएगी। जिन केंद्रों पर ओएमआर शीट का क्रम गलत हुआ है, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं को कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर की मदद से सही क्रम में व्यवस्थित किया जाएगा और फिर मूल्यांकन किया जाएगा।