झाबुआ

‘दुल्हन लाऊं या चांदी?’, कीमतों ने तोड़े आदिवासियों के सपने…लोकगीत में दिखी बड़ी त्रासदी

Silver Price: आदिवासी संस्कृति में चांदी को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कीमतों में उतार-चढा़व ऐसा हुआ कि आदिवासी युवा कलाकार ने परिवारों की व्यथा को सुरो में पिरो दिया...
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Feb 09, 2026
Jhabua Adivasi Shaadi
Jhabua Adivasi Shaadi: Photo AI

Jhabua Adivasi shaadi: आदिवासी संस्कृति में चांदी समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते चांदी आम ग्रामीण की पहुंच से दूर हो रही है। इस विडंबना को मध्यप्रदेश के झाबुआ के युवा कलाकार पूनम डामोर ने सुरों में पिरोया है। लाड़ी लाऊं के चांदी लूं, जिव करे हूं मरी जऊं गीत में युवक कह रहा है- समझ नहीं आ रहा कि दुल्हन लाऊं कि चांदी के आभूषण खरीदूं, मन कर रहा है कि मर ही जाऊं। संगीत कुलदीप भूरिया ने दिया है।

दिल पर चोट कर रहे बोल

घर-नी जमीन वेची दूं, लाड़ी ना बा चांदी मांगे… गीत के ये बोल दिल पर चोट कर रहे हैं। बताया गया है कि कैसे एक युवक शादी के लिए अपनी जमीन, घर के मवेशी तक बेचने को मजबूर हैं, क्योंकि लड़की के पिता चांदी की मांग कर रहे हैं। गीत में यह भी बताया गया है कि चांदी महंगी होने के कारण युवा शादी के लिए कर्ज ले रहे हैं। ब्याज वसूलने वाले धमकियां दे रहे हैं। यह बोल कई गांवों की हकीकत बनते जा रहे हैं। जहां शादी की खुशी कर्ज के बोझ तले दब रही है।

Jhabua Adivasi Chandi Mehangai Silver Price Song(photo:patrika): पूनम डामोर ग्राम मोहनपुरा के रहने वाले हैं। खेती करने के साथ ही 2016 से भीली बोली में गीत भी गाते हैं। स्टूडियो भी बना रखा है।

कर्ज लेकर बनवाने पड़ेंगे जेवर

बेटे राम की शादी ग्राम मालेगांव में तय हुई है। चैत्र के बाद करेंगे। चिंता जेवरों की है। चांदी के बाकड़े, पैर पट्टी, बिछिया और करधनी जरूरी माना जाता है। रिश्तेदारों से कर्ज लेकर जेवर बनवाने पड़ेंगे।

-सुमन जावरकर, ग्राम सावलमेंढा

चांदी के जवर ले जाना परम्परा है

आदिवासी समाज में चाहे परिवार गरीब हो, लेकिन शादी में चांदी के जेवर ले जाना परम्परा है। अच्छे जेवरों की तारीफ होती है। कम वजन के हों तो चर्चा होती है। जेवर गरीबों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।

-राजेश सरियाम, ग्राम सावलमेंढा

Updated on:
09 Feb 2026 10:15 am
Published on:
09 Feb 2026 10:10 am