मार्च-अप्रेल में हुई बेमौसम बारिश के चलते सब्जियों के साथ मसालों पर भी महंगाई का रंग चढऩे लगा है। फिर चाहे चाय का मसाला (सौंठ, लोंग, इलायची या डोडा) हो गया फिर सब्जी का तड़का ।
भवानीमंडी. मार्च-अप्रेल में हुई बेमौसम बारिश के चलते सब्जियों के साथ मसालों पर भी महंगाई का रंग चढऩे लगा है। फिर चाहे चाय का मसाला (सौंठ, लोंग, इलायची या डोडा) हो गया फिर सब्जी का तड़का (जीरा, सौंफ)। इससे ये गरीब या आम ही नहीं अपितु सामान्य वर्ग की भी पहुंच से बाहर हैं। मार्च एवं अप्रेल की बारिश के चलते गर्मी से भले ही लोगों ने राहत महसूस की, लेकिन अब रसोई का पूरा बजट बिगड़ गया है।
मसाले व्यापारियों का कहना है कि अभी की स्थिति को देखकर लग रहा है। इस वर्ष भावों में कमी के आसार कम ही हैं। क्योंकि जिस तरह तीन-चार महीने में इनके भाव दुगुने से भी ज्यादा हुए हैं। ऐसे में आधे भाव कम होना आसान नहीं है।
व्यापारी मनिंदर भाटिया ने भावों की बात करें तो सबसे ज्यादा 600 रुपए किलो बादाम बिक रहा है, लेकिन जीरा, लोंग, काली मिर्च, इलायची के भाव इससे भी ज्यादा हैं। मार्च-अप्रेल में अब जुलाई में भावों में दुगुना अंतर हो गया है। पहले जीरा 450 रुपए किलो बिक रहा था, लेकिन अब 670 पर पहुंच गया है। इसी प्रकार सौंफ 240 से बढकऱ 330 रुपए पर पहुंच गई है। यह तो थोक के भाव हैं। खुदरा में तो जीरा 700 रुपए किलो तक बिक रहा है।
बारिश से हो गया उत्पादन कम
जिला खाद्य व्यापार संघ जिलाध्यक्ष राजेश ने बताया कि फसल पकने के समय मार्च-अप्रेल में हुई बारिश के चलते एक तो उत्पादन प्रभावित हुआ है। साथ ही निर्यात भी बढ़ गया है। दूसरी ओर कुछ किसानों ने भी भाव को देखकर उत्पादन बेचने की बजाय घर में ही स्टॉक कर लिया है। इसके कारण एक साथ भाव बढ़ गए हैं। कुछ वस्तुओं का आयात भी कम हो गया है। अब नई फसल आने तक भाव गिरने की उम्मीद कम ही है।
थोक के भाव प्रति किलो रुपए में
उत्पाद मार्च-अप्रेल जुलाई
जीरा 450 670
सौंफ 240 330
डोडा 800 1100
लोंग 800 1100
साबूदाने 60 90
कालीमिर्च 600 750
धनिया 100 140
अजवायन 160 240
भाव प्रति किलो रुपए में
ड्रायफ्रूट भाव
बादाम 600
किशमिश 220
मखाने 600
अखरोट 600
काजू 700