
हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़। मरीज भर्ती हो गए, उनका इलाज भी हुआ और डिस्चार्ज भी, लेकिन यह सब झालावाड़ जिले के सबसे बड़े सरकारी एसआरजी अस्पताल में केवल कागजों में हुआ। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से करीब 60 लाख रुपए का क्लेम उठा लिया गया। बीमा कंपनी ने क्लेम के लिए आए 82 मामलों की अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड से जांच कराई गई तो तीन-चार मामलों को छोड़कर अधिकांश आईपीडी और डिस्चार्ज टिकट फर्जी पाए गए।
फर्जी टिकटों पर अस्पताल का पंजीयन नंबर, डॉक्टरों के नोट्स और सील तक लगी मिली। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस खेल में अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत भी आशंका है। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एवं एसआरजी अस्पताल की तीन सदस्यीय समिति ने मामले की जांच कर रिपोर्ट अधीक्षक को सौंप दी है। अब पुलिस कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
बीमा क्लेम से जुड़े मामलों की जांच के दौरान सामने आया कि जिन मरीजों के नाम पर क्लेम लिया गया, वे अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए। मेडिसिन, सर्जरी और ऑर्थो विभाग से संबंधित मामलों की जांच में अधिकांश मरीजों का रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में सामने आया कि 82 मामलों में बीमा कंपनी को करीब 60 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान है।
बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए अस्पताल का आईपीडी टिकट, डॉक्टर के नोट्स और डॉक्टर की सील अहम होते हैं। फर्जी टिकटों पर ये तीनों चीजें मौजूद थीं। अस्पताल का पंजीयन नंबर भी इस्तेमाल किया गया। अस्पताल के टिकट और डॉक्टरों की सील फर्जी तरीके से तैयार करने से अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत की आशंका है।
तीन सदस्यीय टीम ने जांच की है। तीन-चार मामलों को छोड़कर सभी टिकट फर्जी पाए गए। अस्पताल में इन मरीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच रिपोर्ट अधीक्षक को सौंप दी गई है।
-डॉ. शकील अंसारी, सदस्य, जांच समिति
बीमा कंपनी की ओर से क्लेम टिकट आए थे। जांच में आईपीडी नंबर और डिस्चार्ज टिकट फर्जी पाए गए। अधीक्षक को सूचना दे दी गई है। अब पुलिस में मामला दर्ज कराया जाएगा।
-दिलीपसिंह खंगारोत, वरिष्ठ मेडिकल रिकॉर्ड ऑफिसर, एसआरजी अस्पताल