झालावाड़

Jhalawar : पहले बड़ा भाई गया, फिर करीब 12 घंटे बाद छोटे ने भी छोड़ा साथ, सकते में परिवार, फूट-फूट कर रोया पूरा गांव

Jhalawar : झालावाड़ के अकलेरा क्षेत्र के ल्हास गांव में गुरुवार को एक परिवार के लिए सदमे से भरा दिन रहा। दो भाइयों की 12 घंटे के अंदर साइलेंट अटैक से मौत हो गई। गत जुलाई में तीसरे भाई की भी अटैक से मौत हो गई थी।
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Jhalawar : छोटा भाई रामबिलास जाटव व बड़ा भाई मांगीलाल जाटव। फाइल फोटो पत्रिका

Jhalawar : झालावाड़ के अकलेरा क्षेत्र के ल्हास गांव में गुरुवार को एक परिवार के लिए सदमे से भरा दिन रहा। परिवार ने कुछ ही घंटों के अंतराल में अपने दो सदस्यों को खो दिया। दोनों रिश्ते में सगे भाई थे। बड़े भाई की बुधवार देर रात तबीयत बिगड़ी और अस्पताल पहुंचते ही दम टूट गया। इसके करीब 12 घंटे बाद गुरुवार दोपहर छोटे भाई की भी मौत गई। दोनों की मौत साइलेंट अटैक से बताई जा रही है। गत जुलाई में इनके तीसरे छोटे भाई की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। दो माह में एक साथ तीन भाईयों को खोने का दर्द परिवार के लिए असहनीय हो गया है।

रात में बड़े भाई की तबीयत बिगड़ी

ल्हास गांव के ग्रामीणों ने बताया कि मांगीलाल जाटव (55 वर्ष) पुत्र भैरूलाल को बुधवाररात करीब एक बजे अचानक साइलेंट अटैक आया। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजन अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि दोपहर करीब एक बजे मांगीलाल के सगे छोटे भाई रामबिलास जाटव (45 वर्ष) की भी अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें भी परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पूरा परिवार सदमे में आ गया।

परिवार में चीख-पुकार मच गई

एक ही दिन दो सगे भाइयों की मौत से परिवार में चीख-पुकार मच गई। यह परिवार इससे पहले जुलाई में तीसरे भाई चैनसिंह (40 वर्ष) को भी खो चुका था। गुरुवार को दोनों भाइयों की मौत की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

क्या है साइलेंट अटैक?

डाक्टरों के अनुसार साइलेंट हार्ट अटैक में सामान्य हार्ट अटैक की तरह छाती में तेज दर्द, भारीपन या पसीना आने जैसे स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि व्यक्ति इन्हें सामान्य थकान या गैस (एसिडिटी) समझकर नजरअंदाज कर देता है। परिवार के अन्य सदस्यों के लिए जरूरी कदम है कि जब किसी परिवार में कम उम्र में या अचानक हार्ट अटैक से मौतें होने का पारिवारिक इतिहास हो, तो जीवित सदस्यों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

Updated on:
17 Sept 2026 09:32 pm
Published on:
17 Sept 2026 09:29 pm