
Jhalawar Bhawani Mandi Child Trafficking: भवानीमंडी (झालावाड़): बचपन को सुरक्षित रखने वाले ही उसके सौदागर बन गए। रिश्तों की आड़ में मासूम बच्चियों की जिंदगी का सौदा होता रहा और ग्राहक उनकी मजबूरी का फायदा उठाते रहे। यह कोई एक-दो घटनाओं का मामला नहीं, बल्कि पुलिस जांच में सामने आया ऐसा नेटवर्क है, जिसमें नाबालिग बच्चियों को देह व्यापार के दलदल में धकेलकर अवैध कमाई की जा रही थी। इस काले कारोबार की परतें तब खुलीं, जब पुलिस ने स्पाई कैमरों के जरिए संदिग्ध ठिकानों पर होने वाली गतिविधियों के डिजिटल साक्ष्य जुटाए।
झालावाड़ पुलिस की जांच में छह नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू कराया गया। इनमें से पांच के साथ बार-बार शोषण कराए जाने की पुष्टि मेडिकल और तकनीकी साक्ष्यों से हुई है। दो बच्चियां यौन संचारित रोगों से पीड़ित मिलीं। मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में पीड़ित बच्चियों के परिजन और नजदीकी लोग शामिल हैं। यानी जिनसे सुरक्षा और संरक्षण की उम्मीद थी, उन्हीं पर बच्चियों के शोषण में शामिल होने के आरोप हैं।
पुलिस की गुप्त जांच में इस नेटवर्क के काम करने का तरीका भी सामने आया। स्पाई कैमरों से जुटाए गए वीडियो में दलालों और परिजनों द्वारा 10 से 20 मिनट के अनैतिक कृत्य के बदले रकम मांगने के दृश्य रिकॉर्ड हुए। कम उम्र की बच्चियों को ग्राहकों के सामने पेश किया जाता था। पुलिस के अनुसार, परिजन और स्थानीय दलाल ग्राहकों से मोटी रकम वसूलकर अवैध कमाई कर रहे थे।
3 नवंबर को 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम ने चिह्नित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान 12 से 17 वर्ष तक की छह नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया। मेडिकल परीक्षण और अन्य साक्ष्यों में पांच बच्चियों के साथ बार-बार शोषण की पुष्टि हुई। एक बच्ची के संबंध में अनुसंधान जारी है। दो बच्चियों में यौन संचारित रोग भी पाए गए हैं।
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़ित बच्चियों के परिजन, नजदीकी पड़ोसी और रिश्तेदार हैं। सभी आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ग्राहकों की भूमिका की जांच कर रही है।
7 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को मिली गोपनीय शिकायत के बाद इस मामले की जांच शुरू हुई। विशेष जांच दल ने गुप्त तरीके से डिजिटल साक्ष्य जुटाए। शिकायत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई की। बच्चियों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर सुरक्षित आश्रय के लिए बालिका गृह भेजा गया है।