पुलिस ने प्रदेश के कई जिलों में एक साथ दबिश दी। इस कार्रवाई में पार्षद समेत 8 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
झालावाड़।
राजस्थान रोडवेज में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा झालावाड़ पुलिस की ओर से हुए एक ताज़ा बड़े खुलासे से हुआ है। पुलिस ने 'ऑपरेशन क्लीन राइड' के तहत एक ऐसे 'मुखबिर गिरोह' को दबोचा है, जो रोडवेज बस के कंडक्टरों को फ्लाइंग (विजिलेंस टीम) की लोकेशन बताकर सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। हैरानी की बात तो ये है कि इस गिरोह का जाल केवल झालावाड़ में ही नहीं, बल्कि जयपुर, कोटा, अजमेर और चित्तौड़गढ़ जैसे बड़े शहरों तक फैला हुआ है।
जानकारी के मुताबिक़ झालावाड़ पुलिस को करीब एक माह पहले इस गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। एसपी अमित कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रोबेशनर आरपीएस कमल कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। पुलिस के जांबाज सिपाही हेमराज और केतन ने साधारण यात्री बनकर रोडवेज बसों में सफर किया। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कंडक्टरों के साथ हो रही डीलिंग के 'स्टिंग ऑपरेशन' किए और गोपनीय वीडियो बनाए। इन वीडियो साक्ष्यों ने गिरोह के काम करने के तरीके को बेनकाब कर दिया।
गिरोह का सरगना कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि झालावाड़ नगर परिषद का निर्दलीय पार्षद नरेंद्र सिंह राजावत है। नरेंद्र सिंह का दबदबा रोडवेज महकमे में इतना था कि वो अपनी मर्जी से चालकों और परिचालकों की ड्यूटी लगवाता था। उसकी मां रोडवेज में कार्यरत होने की वजह से विभाग के हर गलियारे से वो वाकिफ था। वो अधिकारियों को डरा-धमका कर या प्रभाव में लेकर अपना 'समानांतर प्रशासन' चला रहा था।
इस गिरोह को कंडक्टर 'STD' के कोडवर्ड नाम से बुलाते थे। दरअसल, पुराने समय में जब मोबाइल फोन नहीं थे, तब लोग एसटीडी बूथों से सूचना देते थे, इसलिए इस गिरोह का नाम ये पड़ गया।
शुक्रवार को पुलिस ने झालावाड़ समेत प्रदेश के कई जिलों में एक साथ दबिश दी। इस कार्रवाई में पार्षद नरेंद्र सिंह राजावत समेत 8 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके पास से 12 लाख रुपये नकद, 3 लग्जरी कारें, 2 मोटरसाइकिल, 15 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक स्पाई कैमरा पेन और एक पोश मशीन जब्त की है। इसके अलावा भारी संख्या में चेक बुक, एटीएम कार्ड, टिकट डायरी और रोडवेज की मोहरें भी जब्त की हैं।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि यह गिरोह झालावाड़ के अलावा टोंक, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, अजमेर और जयपुर सहित कई अन्य ज़िलों में भी सक्रिय है, जहां से भी संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह की साठगांठ रोडवेज की कुछ फ्लाइंग टीमों के साथ भी थी, जिन्हें गिरोह द्वारा बाकायदा 'हिस्सा' पहुँचाया जाता था।
गिरोह के सदस्यों का रिकॉर्ड बेहद आपराधिक रहा है। साल 2022 में गिरोह के सदस्य बाबू गुर्जर ने तत्कालीन यातायात प्रबंधक के साथ बुरी तरह मारपीट की थी। जो भी ईमानदार अधिकारी इनके काम में बाधा डालता, उसे नौकरी से हटवाने या झूठे केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी। सरगना नरेंद्र सिंह के खिलाफ पहले से ही आधा दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
'ऑपरेशन क्लीन राइड' ने यह साफ कर दिया है कि रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए केवल नई बसें जरूरी नहीं हैं, बल्कि ऐसे माफियाओं का खात्मा भी अनिवार्य है।