
झालावाड़। कभी सरकारी महकमों में प्रशासनिक फैसले लेने और व्यवस्था का संचालन करने वाले अधिकारी को गांव की सरकार के चुनाव में ग्रामीणों ने तीसरे पायदान पर पहुंचा दिया। हाड़ौती में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी और पूर्व अतिरिक्त कलक्टर सियाराम मीणा सरपंच का चुनाव लड़ने मैदान में उतरे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें नकारते हुए एक शिक्षक पर भरोसा जताया। सेवानिवृत्त अध्यापक गजानंद मीणा ने चुनाव जीतकर सरपंच की कुर्सी हासिल कर ली।
झालावाड़ जिले की खानपुर तहसील की गाडरवारा नूरजी ग्राम पंचायत में इस बार सरपंच पद का चुनाव खासा दिलचस्प रहा। यहां सेवानिवृत्त आरएएस सियाराम मीणा ने भी नामांकन दाखिल कर चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई। उनके सामने सरकारी अध्यापक रहे गजानंद मीणा ने ताल ठोकी। प्रशासनिक सेवा के लंबे अनुभव वाले पूर्व अधिकारी के चुनाव मैदान में उतरने से यह मुकाबला आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बन गया।
यहां रोचक मुकाबले में एक तरफ प्रशासनिक सेवा का अनुभव और दूसरी तरफ शिक्षक के रूप में ग्रामीणों के बीच पहचान थी। शुक्रवार को मतदान के बाद देर रात परिणाम घोषित हुए तो चुनावी तस्वीर ने सबको चौंका दिया। ग्रामीणों ने 1401 वोट देकर शिक्षक गजानंद मीणा को अपना सरपंच चुना, जबकि पूर्व अतिरिक्त कलक्टर सियाराम मीणा तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें महज 99 वोट ही मिले। दूसरे नम्बर पर रहे राजेंद्र मीणा ने 1309 वोट हासिल किए। पंचायत में कुल चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि कभी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके अधिकारी को ग्रामीणों ने तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया। वहीं शिक्षक गजानंद मीणा ने मतदाताओं का विश्वास जीतकर सरपंच पद पर कब्जा जमाया। परिणाम के बाद क्षेत्र में इस चुनाव की खूब चर्चा हो रही है। यह मुकाबला बताता है कि गांव की सरकार के चुनाव में पद और प्रतिष्ठा से ज्यादा मतदाताओं का भरोसा मायने रखता है।
झालावाड़ जिले की झालरापाटन, बकानी, पिड़ावा और खानपुर पंचायत समिति की 142 ग्राम पंचायतों में 1032 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करने के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ था। शाम छह बजे तक जिले में कुल 83.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 4,82,802 मतदाताओं में से 4,03,651 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। चारों पंचायत समितियों में बकानी मतदान प्रतिशत के मामले में आगे रही। इसके अलावा खानपुर में 84.66, झालरापाटन में 83.05 और पिड़ावा में 82.46 प्रतिशत मतदान हुआ। पिड़ावा में सबसे कम वोटिंग हुई।