Jhalawar Kolana Runway: कोलाना का रनवे उत्तर भारत के बड़े रनवे में शामिल है। यहां लगभग 60 मीटर चौड़ा और 3KM लंबा रनवे मौजूद है। हवाई पट्टी के दूसरे चरण में विकास के लिए करीब 190 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है।
North India's Largest Runway: झालावाड़ की पहचान अब केवल उसके भव्य किलों और महलों तक सीमित नहीं रही है। आने वाले समय में पर्यटक यूनेस्को के विश्व धरोहर सूची में शामिल जल दुर्ग गागरोन को जल, थल और आकाश तीनों मार्गों से निहार सकेंगे। देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक भविष्य में हवाई सेवाओं के जरिए भी यहां पहुंच सकेंगे। इसके लिए झालावाड़ के कोलाना हवाई पट्टी को आधुनिक बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसे हवाई अड्डे का दर्जा मिलना बाकी है।
कोलाना का रनवे उत्तर भारत के बड़े रनवे में शामिल है। यहां लगभग 60 मीटर चौड़ा और 3KM लंबा रनवे मौजूद है। हवाई पट्टी के दूसरे चरण में विकास के लिए करीब 190 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संकेत देने के लिए रनवे के दोनों ओर अत्याधुनिक लाइटें लगाई गई है। यहां स्वीकृत 169 करोड़ रुपए में से अब तक करीब 165 करोड़ रुपए विभिन्न कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।
कोलाना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा बन सकता है। यहां सड़क और रेलवे की कनेक्टिविटी भी अच्छी है। उड़ान योजना में शामिल किया जाए तो नियमित फ्लाइट शुरू हो सकती हैं। इससे पर्यटन, व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
मुकेश मीणा, अधीक्षण अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग, झालावाड़
कोलाना हवाई पट्टी के आधुनिकीकरण योजना के तहत 35 करोड़ रुपए की लागत से नई टर्मिनल बिल्डिंग, 45 करोड़ रुपए से एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और 10 करोड़ निर्माण प्रस्तावित है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 209 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। रनवे के दोनों ओर ड्रेनेज सिस्टम का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। परिसर में लावारिस मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए बाउंड्रीवाल भी बनाई जा चुकी है। पिछले दिनों यहां पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, योग गुरू बाबा रामदेव और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री के भी निजी विमान यहां उतर चुकें है।
कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश का उपयोग सीएसआर योजना के तहत किया जा रहा है। करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से फ्लाई ऐश के जरिए कोलाना एयरपोर्ट की भूमि को समतल किया जा रहा है।
कोलाना हवाईपट्टी का रनवे देश के बड़े रनवे में शामिल है। इसी कारण यहां फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल शुरू करने की योजना है। पिछले बजट में इसकी घोषणा भी हो चुकी है। इससे यहां बड़ी संख्या में प्रशिक्षु पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पिछले साल नीमच की एक फ्लांइग कम्पनी के एक साथ चार ट्रेनिंग विमान कोलाना हवाई पट्टी पर उतरे थे। कुछ घण्टें बाद यह वापस लौट गए।
कोलाना में का मौजूदा रनवे बोइंग 747 जैसे बड़े विमानों को उतारने में सक्षम माना जा रहा है। इसे और अधिक आधुनिक बनाकर इसकी श्रेणी को अपग्रेड करने की योजना है। ऐसे में भविष्य में यहां घरेलू विमान सेवाएं संचालित की जा सकती हैं। एयरपोर्ट पर 23 मीटर चौड़ा और करीब 600 मीटर लंबा टैक्सी वे भी बनकर तैयार हो चुका है, जहां एक साथ आठ से दस विमान खड़े किए जा सकते हैं।