UP Liquor Shop License: नई नीति के तहत देसी शराब में पहली बार 100 एमएल का ‘छोटू’ पैक 50 रुपये में लोगों को मिलेगा। अंग्रेजी शराब की कीमतों में 10-30 रुपये तक बढ़ोतरी की गई है।
UP Liquor Shop License News: उत्तर प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होने के बाद शराब के कारोबार में बड़े बदलाव आए हैं। जनपद स्तर पर अंग्रेजी और देसी शराब के व्यवस्थापन का काम शुरू हो गया है। यह काम अगले महीने तक पूरा किया जाना है। नीति का मुख्य उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और छोटे कारोबारियों को मौका देना है।
पहले होलसेल (थोक) लाइसेंस के लिए व्यापारियों को 20-25 लाख रुपये फीस जमा करनी पड़ती थी। समस्या यह थी कि कम उठान (शराब की खरीद) वाले गोदामों को भी पूरी फीस देनी पड़ती थी। इससे छोटे और मध्यम कारोबारी इस काम से दूर रहते थे। अब नई नीति में लाइसेंस फीस काफी कम कर दी गई है। नए वित्तीय वर्ष में होलसेल लाइसेंस की फीस
घटाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।
हालांकि अब इंटेंट (उठान या बिक्री) के आधार पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा। यह शुल्क 0.4 से 0.5 प्रतिशत के बीच होगा। ज्यादा बिक्री या उठान पर ज्यादा शुल्क देना होगा, जबकि कम कारोबार करने वालों को कम शुल्क चुकाना पड़ेगा। इससे सबसे ज्यादा फायदा छोटे कारोबारियों को होगा। वे अब आसानी से थोक लाइसेंस लेकर काम शुरू कर सकेंगे। छोटे कारोबारियों को राहत और गोदामों पर दबाव कम आबकारी अफसरों का कहना है कि फीस कम होने से गोदामों में अनावश्यक दबाव कम होगा। पहले फिक्स्ड हाई फीस के कारण छोटे व्यापारी पीछे रह जाते थे।
अब वे भी बाजार में उतर सकेंगे। नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानों का कोटा भी बढ़ाया गया है। इससे शराब की उपलब्धता बेहतर होगी। जिला आबकारी अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि लाइसेंस फीस में कटौती से छोटे कारोबारी खुश हैं। दुकानों और गोदामों का व्यवस्थापन तेजी से शुरू हो गया है। यह बदलाव कारोबार को बढ़ावा देगा और अवैध शराब पर भी लगाम लगाएगा।
नई नीति में पहली बार देसी शराब को अंग्रेजी शराब की तर्ज पर छोटा पैक मिलेगा। अब 100 मिलीलीटर (100 एमएल) का 'छोटू' या मिनिएचर पैक बाजार में आएगा। यह 42.8 डिग्री तीव्रता वाली बोतल होगी, जिसकी कीमत 50 रुपये तय की गई है। पहले देसी शराब में सबसे छोटी इकाई 'पौवा' थी। आबकारी निरीक्षक मनोज कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, यह पैक उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक होगा। साथ ही अंग्रेजी शराब की कीमतों में 10 से 30 रुपये तक का इजाफा होगा। कुल मिलाकर नीति से राजस्व बढ़ेगा और छोटे स्तर पर कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।