झुंझुनू

चूल्हा-चौका छोड़ चुनावी प्रचार में उतरीं बुहाना की 25 महिलाएं, थम गए सियासी गलियारे; उड़ाई विरोधियों की नींद

झुंझुनूं जिले में नवनिर्मित बुहाना नगर पालिका चुनाव में इस बार 20 वार्डों से 89 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 25 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय के रूप में ये महिलाएं चूल्हा-चौका छोड़ घर-घर जनसंपर्क कर विकास के मुद्दों पर समर्थन मांग रही हैं।
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Sep 06, 2026
buhana municipality election
चुनावी प्रचार में उतरीं बुहाना की 25 महिलाएं (फोटो-एआई)

झुंझुनूं: बुहाना नगर पालिका चुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ प्रत्याशियों ने जनसंपर्क और प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। इस बार चुनावी मैदान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी खास चर्चा का विषय बनी हुई है। घर की चारदीवारी और पारंपरिक घूंघट तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब चूल्हा-चौका छोड़कर चुनाव प्रचार की कमान संभाल रही हैं और मतदाताओं के बीच पहुंचकर अपने लिए समर्थन मांग रही हैं।

नवनिर्मित बुहाना नगर पालिका के कुल 20 वार्डों में 89 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 25 महिला प्रत्याशी हैं, जो भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रही है। सुबह से देर शाम तक गली-मोहल्लों में महिला प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की टोलियां नजर आ रही है। कहीं बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जा रहा है तो कहीं महिलाओं के बीच बैठकर स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की जा रही है।

अध्यक्ष पद का आरक्षण भी बना चर्चा का केंद्र

इस बार नगर पालिका अध्यक्ष का पद एससी सामान्य के लिए आरक्षित है। ऐसे में अध्यक्ष पद के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चुनावी चर्चा तेज है। वार्ड पार्षदों के चुनाव के साथ ही राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नजर भविष्य में बनने वाले बोर्ड पर है। यही कारण है कि कई वार्डों में मुकाबला केवल पार्षद बनने तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि आने वाले बोर्ड में राजनीतिक प्रभाव कायम करने की होड़ भी नजर आ रही है।

हर चौखट पर दस्तक, विकास के मुद्दे साथ

महिला प्रत्याशियों के प्रचार में स्थानीय मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। पानी, सड़क, सफाई, नालियों की समस्या और मूलभूत सुविधाएं उनके जनसंपर्क का प्रमुख एजेंडा हैं। प्रत्याशी घर-घर पहुंचकर लोगों से संवाद कर रही हैं और वार्ड की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिला रही है। कई जगह महिला प्रत्याशी घूंघट में ही बुजुर्गों से आशीर्वाद लेती नजर आ रही है तो दूसरी ओर मतदाताओं के बीच बैठकर अपनी प्राथमिकताएं भी बता रही है। इससे चुनाव प्रचार में पारंपरिक सामाजिक परिवेश और बदलती राजनीतिक भागीदारी का अनूठा मेल दिखाई दे रहा है।

महिला मतदाताओं को साधने पर भी जोर

महिला प्रत्याशियां केवल अपने लिए वोट नहीं मांग रहीं, बल्कि महिला मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक करने में भी जुटी हैं। घर-घर जनसंपर्क के दौरान वे महिलाओं से सीधे संवाद कर रही हैं। महिला समूहों के माध्यम से अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

चौपाल तक बदली भूमिका

चुनावी मैदान में महिला प्रत्याशियों की सक्रियता सामाजिक बदलाव की तस्वीर भी दिखा रही है, जिन महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अब तक परिवार के पुरुष सदस्यों के माध्यम से दिखाई देती थी, वे अब स्वयं मतदाताओं के बीच पहुंच रही हैं।

कई प्रत्याशियों के लिए यह पहला चुनाव है, लेकिन प्रचार के दौरान उनका आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा है। 25 महिला प्रत्याशियों की सक्रिय मौजूदगी ने बुहाना के चुनाव को सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं रहने दिया है, बल्कि यह बदलती सामाजिक भूमिका और स्थानीय राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उदाहरण बन गया है।