झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव भंडौन्दा कला निवासी आलोक झाझडिया बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, साॅफ्टवेयर इंजीनियरिंग का 16 लाख का पैकेज छोड़ पहनी सेना की वर्दी
झुंझुनूं। झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव भंडौन्दा कला निवासी आलोक झाझडिया ने आखिर अपने बचपन का सपना पूरा कर लिया। वे अपनी कठिन मेहनत और लग्न के चलते आखिर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए। इसके लिए छोटी उम्र में ही उन्होंने पढ़ने के लिए गांव को छोड़ जयपुर चुना। यहां आर्मी पब्लिक स्कूल में अपनी पूरी शिक्षा की। इसके बाद सेना की परीक्षा पास कर अठारह माह की कठिन ट्रेनिंग पूरी की। अब वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं।
आलोक के पिता इन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने जयपुर में स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद पुणे के आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। साॅफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने एक प्रतिष्ठित कम्पनी में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया और 16 लाख सालाना की आकर्षक सैलरी पाई। अच्छे पैकेज के बाद भी उनका मन इंजीनियरिंग में नहीं लगा तो उन्होंने नौकरी छोड़ अपने बचपन की इच्छा पूरी करने में जुट गए।
आलोक ने 24 एसएसबी में चयनित होकर भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने का सपना पूरा किया। आलोक के परदादा नारायण राम ने द्वितीय राजपुताना राइफल्स में सेवा दी। उनके दादा सूबेदार (रिटा.) विद्याधर सिंह, पिता आनरेरी नायब सूबेदार (रिटायर) इन्द्र सिंह, और चाचा सुबेदार सत्यवीर सिंह भी सेना की वर्दी पहन चुके।