
नवलगढ़ (झुंझुनूं): आस्था के बड़े केंद्र लोहार्गल धाम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और चिकित्सा इंतजामों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हरियाली अमावस्या पर सूर्यकुंड में स्नान और मंदिरों में दर्शन के बाद बरखंडी पर्वत से लौट रहे नवलगढ़ उपखंड के श्रद्धालु की रास्ते में तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। पथरीली और ऊबड़-खाबड़ चढ़ाई के बीच अचानक मूर्छित हुए श्रद्धालु को नीचे लाने में साथियों और पुलिस जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि पुजारी की ढाणी निवासी रामनिवास जांगिड़ उर्फ सुरेश जांगिड़ (45) पुत्र औंकारमल जांगिड़ बुधवार को 3-4 साथियों के साथ लोहार्गल पहुंचे थे। यहां सूर्यकुंड में स्नान करने के बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना की। इसके बाद सभी बरखंडी पर्वत पर बने मंदिर में दर्शन के लिए पथरीली चढ़ाई चढ़कर पहुंचे। दर्शन करने के बाद लौटते समय साथियों ने पास की पहाड़ी पर स्थित केदारनाथ मंदिर की ओर जाने वाला रास्ता पकड़ लिया।
बताया गया कि ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्ते पर काफी देर तक चलने के कारण रामनिवास थक गए। इसी दौरान अचानक मूर्छित होकर गिर पड़े। साथियों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर परिचितों को सूचना दी।
घटना की सूचना मिलने पर लोहार्गल धाम चौकी प्रभारी हेड कांस्टेबल राजेश सैनी, कांस्टेबल बाबूलाल गुर्जर और सोहनलाल मौके पर पहुंचे। इसके बाद साथियों और पुलिस ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद रामनिवास को पहाड़ी से नीचे उतारा। पुलिस ने उन्हें नवलगढ़ जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया गया है।
लोहार्गल जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए पर्वतीय रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। विशेषकर बरखंडी पर्वत और अन्य ऊंचाई वाले मंदिरों तक जाने वाले रास्तों पर रेस्क्यू टीम, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, स्ट्रेचर, प्रशिक्षित कर्मचारी और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था हो तो ऐसी परिस्थितियों में श्रद्धालु को समय पर मदद मिल सकती है। साथ ही बुजुर्ग और हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित श्रद्धालुओं को ऊंचाई वाले और कठिन रास्तों पर जाने से पहले सावधानी बरतने के लिए जागरूक करने की भी आवश्यकता है।
बरखंडी पर्वत पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार के बजट में रोप-वे लगाने की घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद क्षेत्र में इसे लेकर उत्साह भी नजर आया था, लेकिन करीब दो साल बीतने के बावजूद रोप-वे का काम शुरू नहीं हो पाया है।
बुधवार को श्रद्धालु की मौत के बाद एक बार फिर रोप-वे की घोषणा चर्चा में आ गई। लोगों का कहना है कि यदि कठिन चढ़ाई वाले मार्ग पर रोप-वे की सुविधा विकसित होती है तो बुजुर्गों, महिलाओं और शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को काफी राहत मिल सकती है। साथ ही पहाड़ी मार्ग पर भीड़ और दुर्घटना के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
श्रावण मास में लोहार्गल धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सूर्यकुंड में स्नान के बाद श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों में दर्शन करते हैं। शिवभक्त गोमुख से कावड़ पात्र में पवित्र जल भरकर अपने गांव-शहर ले जाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
इतने बड़े धार्मिक स्थल पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद पर्वतीय मार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा, रेस्क्यू और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। किसी श्रद्धालु की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे पहाड़ी से नीचे लाने में ही काफी समय लग जाता है। ऐसे में मौके पर प्राथमिक चिकित्सा और त्वरित रेस्क्यू की व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है।