Vice President Jagdeep Dhankhar Resigns: किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बने थे। इसके कुछ दिन बाद वे गांव आए और गांव के ठाकुर जी मंदिर और जोड़िया बालाजी मंदिर में दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया था।
Jagdeep Dhankhar Hometown: ‘वे पद पर रहें या नहीं, लेकिन हमारे लिए तो हमेशा उपराष्ट्रपति ही रहेंगे।’ यह शब्द हैं झुंझुनूं जिले के किठाना गांव के ग्रामीणों के, जो सोमवार शाम अपने गांव के लाडले जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की खबर से स्तब्ध रह गए। जैसे ही यह सूचना गांव पहुंची, लोग एकत्र होने लगे, आपस में चर्चा तेज हो गई और पूरे गांव में भावनात्मक माहौल बन गया। गांव के लोगों को भले ही उनके अचानक इस्तीफे की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उन्होंने कहा कि धनखड़ ने जो पहचान गांव को दिलाई है, वह कभी नहीं मिट सकती। एक ग्रामीण ने कहा ‘उपराष्ट्रपति बनने के बाद गांव में एक बार आए होंगे, पर जो सौगातें देकर गए, वो पीढ़ियां याद रखेंगी।’
धनखड़ का पैतृक निवास स्थान (फोटो: पत्रिका)
किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बने थे। इसके कुछ दिन बाद वे गांव आए और गांव के ठाकुर जी मंदिर और जोड़िया बालाजी मंदिर में दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया था। गांव वालों को आज भी वह दृश्य याद है, जब गांव का बेटा देश का उपराष्ट्रपति बनकर आशीर्वाद लेने आया था।
ग्रामीणों ने बताया कि धनखड़ ने उपराष्ट्रपति रहते गांव का नाम देश और दुनिया में फैलाया। जिसके चलते गांव को काफी पहचान भी मिली। उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति धनखड़ गांव से दूर होने के बावजूद सदैव अपना लगाव रखते थे। वे समय-समय पर गांव के लोगों से बात कर विकास कार्यों से जुड़ी भविष्य की योजनाओं पर भी काफी चर्चा करते थे। भले ही पद की व्यस्तता के कारण धनखड़ गांव कम आ पाए, लेकिन गांव के प्रति उनका जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ अक्सर किठाना आती थीं, और गांव के विकास कार्यों पर स्थानीय लोगों से खुलकर चर्चा करती थीं।
किठाना में 8 सितम्बर 2022 को आए उप राष्ट्रपति व उनकी पत्नी लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए (फोटो: पत्रिका)
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की वजह से किठाना को काफी प्रसिद्धि मिली। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने विकास कार्यों में भी काफी योगदान दिया। सरपंच प्रतिनिधि हीरेंद्र धनखड़ के मुताबिक उपराष्ट्रपति धनखड़ के प्रयासों से गांव में सरकारी कॉलेज, खेल स्टेडियम, आयुर्वेदिक अस्पताल भवन सहित अन्य विकास कार्य हुए। धनखड़ की मांग पर गांव से नेशनल हाईवे का सर्वे कार्य शुरू हुआ। उन्हीं के परिवार के सहयोग से जोड़ियां बालाजी मंदिर में भी निर्माण कार्य चल रहा है।
ग्रामीणों की मुताबिक धनखड़ की तबीयत मार्च से ठीक नहीं चल रही थी। धनखड़ की पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ पहले चार-पांच दिन तक भी गांव में रुक जाती थी, वहीं तबीयत खराब होने के बाद वे एक या दो दिन बाद ही वापस लौट जाती थी। वे भी ग्रामीणों को उपराष्ट्रपति धनखड़ के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी देती रहती थी।