Real Life Motivational Story: झुंझुनूं के सुभाष वर्मा की संघर्ष की कहानी अनोखी है। पिता के निधन के बाद मां ने मजदूरी कर बेटे को अफसर बनाया तो बेटे ने करीब 13 किलोमीटर पैदल चलकर पूरी की कॉलेज।
Labour day 2024: हर मां-बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे अच्छे पढ़ लिखकर कामयाब हों और उनका नाम रोशन करें। बेटा हो या बेटी, उन्हें कामयाब बनाने के लिए मां-बाप दिन-रात मेहनत मजूदरी करते हैं। झुंझुनूं जिले में भी ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें माता पिता ने कड़ा संघर्ष कर अपने बेटे-बेटियों को कामयाबी दिलाई है। वहीं बेटे, बेटियाें ने भी अपने माता-पिता की मेहनत को बेकार नहीं जाने दिया। वे भी उतनी मेहनत कर माता-पिता के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
पचलंगी का सुभाष वर्मा मुम्बई में भारतीय मौसम विभाग कार्यालय में सहायक वैज्ञानिक पद पर कार्यरत है। उसके पिता भोलाराम का 24 साल पहले निधन हो गया। मां केसरी देवी ने मनरेगा में मजदूरी कर उसे पढ़ाया। उसका सपना था कि वह एक दिन बड़े ओहदे पर पहुंचेगा। मां को मजूदरी करते देख बेटे सुभाष ने भी ठान ली कि वह अभावों से गुजर कर भी सफलता हासिल करेगा। सरकारी कॉलेज से बीएससी करने के लिए उसे करीब 13 किलोमीटर पैदल चलकर भी नीमकाथाना जाना पड़ा। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किसी कोचिंग में प्रवेश नहीं ले पाया। इसलिए अपने स्तर पर ही तैयारी की। यह लक्ष्य लेकर चला कि नौकरी लगने के बाद ही गांव जाऊंगा।