झुंझुनू

ये है राजस्थान के ‘अफसरों वाले गांव’, हर घर में मिलेगा एक ऑफिसर, कई RAS, IAS-IPS, डॉक्टर-इंजीनियर यहां से

Nua Jhunjhunu: राजस्थान के झुंझुनूं जिले का नूआं गांव आज शिक्षा और देशसेवा की मिसाल बन चुका है। यहां हर घर से कोई न कोई अफसर, सैनिक, डॉक्टर या इंजीनियर निकल रहा है, जिसके कारण यह इलाका ‘अफसरों वाले गांव’ के नाम से पहचान बना चुका है।
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May 15, 2026
Officer Village Of Rajasthan
गांव की बेटी कर्नल इशरत अहमद और नूआं गांव की फोटो: पत्रिका

Officer Village Of Rajasthan: शेखावाटी की धरती शिक्षा और देशसेवा की परंपरा के लिए जानी जाती है, लेकिन झुंझुनूं जिले का नूआं गांव इस परंपरा की एक अलग पहचान बन चुका है। करीब 12 हजार आबादी वाला यह गांव और आसपास के लगभग 30 किलोमीटर दायरे के दर्जनों गांव आज ‘अफसरों वाले गांव’ के रूप में जाने जाते हैं। यहां से सैकड़ों युवा भारतीय सेना, प्रशासन, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में उच्च पदों तक पहुंचे हैं।

वर्तमान में नूआं गांव के लगभग 300 से 400 लोग विभिन्न सेवाओं में कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आसपास के कृष्णियाओं का बास, टांई, पाटोदा, भारू और ढिगाल सहित कई गांवों में भी शिक्षा और सेवा की यह परंपरा मजबूत हुई है।

1931 में शुरू हुई शिक्षा की यात्रा

इस बदलाव की नींव वर्ष 1931 में अंग्रेजी सेना में कार्यरत कैप्टन ताज मोहम्मद ने रखी, जब उन्होंने गांव में सरकारी प्राथमिक विद्यालय की शुरुआत की। उस समय शिक्षा का माहौल लगभग न के बराबर था, लेकिन यह स्कूल आगे चलकर गांव की पहचान बन गया। बाद में यह विद्यालय क्रमोन्नत होकर सीनियर सेकेंडरी स्कूल बना।

भामाशाहों ने दिया विकास को सहारा

कैप्टन ताज मोहम्मद के बाद सेठ फूलचंद जालान सहित कई भामाशाहों ने शिक्षा और विकास की इस धारा को आगे बढ़ाया। स्कूल भवन के साथ-साथ अस्पताल, पानी की टंकियां और अन्य सुविधाएं विकसित हुईं। इसका प्रभाव यह रहा कि आसपास के गांवों के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा लेने आने लगे और क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक बदलाव दिखने लगा।

बेटियां भी बढ़ा रही हैं मान

नूआं गांव की बेटियां भी अब देश सेवा में पीछे नहीं हैं। गांव की बेटी कर्नल इशरत अहमद भारतीय सेना की ऑर्डिनेंस यूनिट की कमान संभालने वाली राजस्थान की पहली महिला कर्नल बनी हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र में सेवाएं दे रही हैं। उनका परिवार भी सैन्य सेवा से जुड़ा रहा है, जिसमें उनके पिता कर्नल जकी अहमद और भाई ब्रिगेडियर शाकिब हुसैन शामिल हैं।

ढाई सौ की आबादी वाले गांव में हर घर में अफसर

नूआं से करीब डेढ़ किमी दूर कृिष्णयां का बास में महज ढाई से तीन सौ की आबादी है। यहां पर हर घर में अफसर हैं। रिटायर्ड एडीईओ रवींद्र कृष्णयां बताते हैं कि गांव से चार आरएएस, दो आइपीएस, दो एएसपी, दो कर्नल, पांच डॉक्टर, पांच इंजीनियर, डीएफओ समेत, शिक्षक, प्रधानाचार्य समेत अन्य सरकारी पदों पर रह चुके हैं। इनमें कई रिटायर हो चुके और कई वर्तमान में कार्यरत हैं।

Updated on:
15 May 2026 12:31 pm
Published on:
15 May 2026 11:43 am