शहरों में कैफेज, रेस्टोरेंट्स में यंगस्टर्स को मिल रहा है ‘ऑफिस स्पेस’, प्रति घंटे के हिसाब से भी कर सकते हैं बुक
ग्यारह महीने का रेंट एग्रीमेंट, हार्डकोर बॉन्ड्स और भारी भरकम कमर्शियल रेंट्स। कुछ समय पहले तक अर्ली एज स्टार्टअप्स फाइनेंशियली स्ट्रॉन्ग न होने की वजह से कुछ इन्हीं दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब ये दिन गुजर चुके हैं। यंग एंड डायनामिक स्टार्टअप्स की तरह पैशनेट स्मार्ट को-वर्किंग कैफेज ने इन्हीं समस्याओं को दूर करने का काम किया है। इन कैफेज और रेस्टोरेंट्स के जरिए स्टार्टअप्स को प्रति घंटे के हिसाब से ऑफिस स्पेस मिल रहा है। जिसमें वे अपने आइडियाज को डवलप करने में लगे हैं। एक्सपट्र्स का कहना है कि जयपुर में स्टार्टअप के लिए तेजी से ईकोसिस्टम डवलप हो रहा है। ‘भामाशाह टेक्नोहब’ की ओपनिंग के बाद अब देश की निगाहें जयपुर पर हैं।
फ्रीडम और एन्वायर्नमेंट के लिए बनी चॉइस
इन कैफेज में एंटरप्रेन्योर्स जब चाहें स्पेस ले सकते हैं। सुबह ९ बजे से रात ९ बजे तक और स्पेशल केसेज में मिडनाइट तक खास सुविधाएं मिलती हैं। इन कैफेज में हाई स्पीड इंटरनेट, कॉम्प्लिमेंट्री बेवरेज, नेटवर्र्किंग, कॉन्फ्रेंस रूम, मीटिंग स्पेस और इंवेस्टर्स मीट जैसे ऑप्शन मिलते हैं। मानसरोवर स्थित सुइट कैफे के फाउंडर अभिजीत मुखर्जी का कहना है कि को-वर्र्किंग कैफेज में जाना यंगस्टर्स के डेली रुटीन में शामिल हो चुका है। कई सक्सेसफुल स्टार्टअप्स ने यहां अर्ली एज में अपनी कहानियां गढ़ी हैं। यहां तक कि कई कॉर्पोरेट कंपनीज और इंटरनेशनल स्टार्टअप्स भी यहां अपने ऑपरेशन रन कर चुके हैं। अभिजीत का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में काफी अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिला है। यूथ को जो फ्रीडम और एन्वायर्नमेंट चाहिए, उन्हें वो एेसे कैफेज प्रोवाइड करा रहे हैं। स्टार्टअप्स को यहां मेंटरिंग और फंडिंग भी प्रोवाइड कराई जाने लगी है। २५ से ज्यादा स्टार्टअप्स ने यहां काम किया है। स्टार्टअप लेजेंड के ओनर राकेश कुमार रॉय और हबीबुर रहमान का कहना है कि टु टियर सिटीज में मेट्रो सिटीज के मुकाबले इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट सिस्टम की कमी थी, इस परेशानी को देखते हुए को-वर्र्किंग स्पेसेज ने अल्ट्रा मॉडर्न फैसिलिटीज से लैस को-वर्र्किंग स्पेस के अलावा उन्हें बेसिक सपोर्ट सिस्टम भी दिया है। ये स्पेस आउट ऑफ द बॉक्स जाकर काम करने पर फोकस करते हैं। जयपुर के ७० से ८० स्टार्टअप्स को गाइड कर रहे हैं।
वहीं महिला कर्मियों के लिए चाइल्डकेयर जैसी एमिनिटी देने लगे हैं। इसके जरिए उनके बेबीज की देखभाल तक की सुविधा देते हैं। इसके अलावा कई एेसे मॉड्यूल्स बनाए हैं, जिनसे स्टार्टअप्स के पास पैसे भले ही न हों, लेकिन फिर भी उन्हें मेंटरिंग प्रोवाइड की जाती है।
कस्टमाइज प्राइवेट ऑफिसेज
को-वर्किंग स्पेस के साथ स्टार्टअप्स कस्टमाइज प्राइवेट ऑफिस भी बुक करा सकते हैं। इसमें अपनी सुविधा और जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइजेशन कराया जा सकता है। अपनी टीम्स के साथ यहां २४ घंटे तक के लिए एक्सेस कर सकते हैं। स्टार्टअप ‘इनडिब्नी’ के फाउंडर अंकित जैन, नितिन जैन और खुशबू माथुर का कहना है कि यंगस्टर्स को एक हैल्दी माहौल चाहिए होता है। हाई स्पीड इंटरनेट, को-लिविंग अकॉमोडेशन और थकान दूर करने के लिए टी, कॉफी जैसी चीजों की जरूरत होती है। एेसे में शहर के ये कैफेज एक नया ऑप्शन बनकर उभर रहे हैं। ‘हिप्पोकैब्स’ के फाउंडर साहिल और सागर अग्रवाल कहते हैं कि यूथ को एक एेसा स्पेस चाहिए जहां उन्हें फ्रीडम हो और वे अपने आइडियाज शेयर कर सकें, ये कैफेज इसमें काफी मदद करते हैं। ‘क्रिस्पटॉक्स’ की फाउंडर रचना घीया कहती हैं ये स्मार्ट कैफेज और को-वर्र्किंग स्पेस फीमेल्स के लिए भी काफी सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। ‘सीबैटर’ के फाउंडर अनुज अग्रवाल का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा मेंटरिंग और सपोर्ट सिस्टम में ये स्पेस अर्ली एज स्टार्टअप्स को काफी मदद कर रहे हैं।
एमिनिटीज
- चाइल्डकेयर
- हाई स्पीड इंटरनेट
- को-लिविंग अकॉमोडेशन
- लाइब्रेरी
- मार्केट स्पेस
- पर्सनल लॉकर्स
- स्काइप रूम
- काम्प्लीमेंट्री वेबरेज
- प्रिंटर्स, ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग