
जोधपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का आरोप लगाया। साथ ही राज्य के विभिन्न मुद्दों पर भी सरकार की नीतियों की आलोचना की। जोधपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि कोटा में प्रसूता महिलाओं की मौत और गंभीर संक्रमण बेहद चिंताजनक है । महिलाएं सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल जाती हैं, लेकिन यदि वहां संक्रमण व मौत हो जाए या किडनी फेल जैसी स्थिति हो जाए तो यह अत्यंत गंभीर है।
बीकानेर और अब जोधपुर से भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। जिससे जनता में भय है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कोटा की घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे? संक्रमण, ऑपरेशन थिएटर की गड़बड़ी या दवाइयों में कोई समस्या थी, इसकी जानकारी जनता को दी जानी चाहिए। बिना जांच पूरी हुए यह कहना कि जोधपुर की घटना कोटा जैसी नहीं है, उचित नहीं है।
पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार ने एम्स और अन्य विशेषज्ञ को जांच के लिए बुलाया है, यह स्वागत योग्य कदम है, लेकिन कोटा की घटना का कारण डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सरकार स्पष्ट नहीं कर पाई है। स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी और आवश्यकता पड़ने पर कांग्रेस आंदोलन करेगी।
पूर्व सीएम गहलोत ने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बयान लगातार विवादों में रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना गरीब और अमीर सभी के लिए थी। राजस्थान देश का एकमात्र ऐसा राज्य था, जहां लगभग 90 प्रतिशत जनता इस योजना से जुड़ी थी।आयुष्मान भारत योजना सीमित दायरे वाली योजना है । जो व्सभी नागरिकों के लिए नहीं है।
पूर्व सीएम गहलोत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। गहलोत ने कहा कि चुन-चुनकर अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। कुछ गांवों में हिंदू समुदाय भी संबंधित इन धार्मिक स्थलों में आस्था रखते हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से इस संबंध में जवाब देने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जयपुर में विकसित कोचिंग हब के बारे में कहा कि पिछली सरकार ने आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसर तैयार किया था, लेकिन वर्तमान सरकार उसका उपयोग नहीं कर रही है। भवन, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट और अन्य सुविधाएं तैयार होने के बावजूद परियोजना बंद पड़ी है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति कमजोर हो चुकी है। विभिन्न विभागों के भुगतान रुके हुए हैं, दो-दो करोड़ रुपए के चेक जारी नहीं हो रहे हैं। पेंशनधारकों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है। यदि सरकार भुगतान करने में असमर्थ है तो जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर गहलोत ने कहा कि पहले इसका मसौदा सामने आने दिया जाए। फिर चर्चा की जाएगी।
गहलोत ने राज्य में बढ़ते अपराध की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गरीब और पीड़ित लोगों को थानों में न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है।
जोधपुर के पानी संकट का उल्लेख करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने बड़े स्तर पर परियोजनाएं शुरू की थीं। वर्तमान सरकार उन योजनाओं को समय पर पूरा नहीं कर पा रही है और पानी की समस्या को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है।
मंत्री का पानी संकट का मजाक उड़ाना उचित नहीं है। जोधपुर मे एलिवेटेड रोड बनाने की बात आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने स्वयं केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि श्रेय लेने की राजनीति के बजाय परियोजना को जल्द पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि जोधपुर के कुछ भाजपा विधायक स्वयं अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर असंतोष जता चुके हैं। इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।