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जोधपुर पुलिस थाने में युवक की मौत का मामला: प्रदर्शन के बाद बनी सहमति, हेड कांस्टेबल लाइन हाजिर

Jodhpur News: जोधपुर के बासनी थाने में पूछताछ के लिए बुलाए गए अमृतदास की कथित रूप से विषाक्त पदार्थ खाने से मौत के बाद बवाल मच गया था। एम्स मोर्चरी के बाहर परिजनों और समाज के लोगों ने धरना दिया। मामले में हेड कांस्टेबल लाइन हाजिर, न्यायिक जांच और मुआवजे का आश्वासन दिया गया।

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Jodhpur Youth Dies

मृतक युवक (पत्रिका फोटो)

Jodhpur Basni Police Station: जोधपुर: जोधपुर स्थित बासनी पुलिस थाने में पूछताछ के लिए बुलाए गए एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में विषाक्त पदार्थ खाने से हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घटना के विरोध में बीते दिनों बुधवार को दिनभर भारी बवाल और विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी रहा। मृतक के परिजनों और समाज के लोगों ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अस्पताल की मोर्चरी के बाहर डेरा डाल दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र धरना-प्रदर्शन किया। कई दौर की लंबी वार्ताओं और समझाइश के बाद आखिरकार देर रात दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सकी, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया।

बता दें कि बासनी थाना पुलिस ने सांगरिया के रहने वाले युवक अमृतदास को किसी मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। परिजनों का आरोप है कि थाने में रहने के दौरान ही अमृतदास ने संदिग्ध परिस्थितियों में कोई विषाक्त पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी तबीयत अचानक बेहद बिगड़ गई। पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में उसे स्थानीय एम्स अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद करीब ढाई घंटे चले उपचार के बाद उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की खबर फैलते ही उसके परिजनों और समाज के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा

अस्पताल के बाहर दिनभर चला धरना, समाज में भारी आक्रोश

एम्स अस्पताल के बाहर माहौल तनावपूर्ण हो गया। वैष्णव समाज के गणमान्य नागरिक घनश्याम दास और कांग्रेस नेता परसराम समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग और नेता धरने में शामिल होने पहुंचे। परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर प्रताड़ित करने और लापरवाही बरतने के कई गंभीर आरोप लगाए। आक्रोशित लोगों की मांग थी कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले।

हेड कांस्टेबल लाइन हाजिर

मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस के आला अधिकारियों को दखल देना पड़ा। पुलिस प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच दिनभर में कई दौर की वार्ताएं हुईं। प्रशासन ने परिजनों की मुख्य मांगों को स्वीकार कर लिया। मामले में प्रथम दृष्टया कार्रवाई करते हुए संबंधित हेड कांस्टेबल को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।

साथ ही प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और राज्य सरकार से उचित मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया, जिसके बाद रात को धरना हटाया गया। मृतक अमृतदास का पोस्टमार्टम गुरुवार सुबह न्यायिक मजिस्ट्रेट की प्रत्यक्ष मौजूदगी और देखरेख में किया गया।

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