
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। फोटो पत्रिका नेटवर्क
जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव समय पर न कराए जाने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जालोर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि संविधान के दायरे में रहकर समय पर चुनाव कराना बेहद आवश्यक है, लेकिन मौजूदा सरकार हार के डर से भाग रही है। इस कदम की पूरे प्रदेशवासियों को एक सुर में निंदा करनी चाहिए। जब सरकार संविधान की मर्यादा को ही नहीं मानती, तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह सरकार नैतिक रूप से बर्खास्त करने लायक है। गहलोत ने कहा कि कायदे से तो राज्यपाल को राष्ट्रपति के पास मौजूदा सरकार को तुरंत बर्खास्त करने की सिफारिश भेजनी चाहिए, लेकिन आज देश के हालात बहुत गंभीर हैं और डबल इंजन के नारे के आड़ में लोकतंत्र सीधे खतरे में है।
अशोक गहलोत ने कहा कि साल 1998 में जब मैं मुख्यमंत्री था, तब कर्मचारियों की हड़ताल हो गई थी। कर्मचारियों की हड़ताल के बीच चुनाव कराना मुश्किल था, इसलिए मैंने भी कोशिश की थी कि चुनाव कुछ समय के लिए टल जाएं। लेकिन हाई कोर्ट का स्पष्ट आदेश आया कि चाहे जैसे भी हो, चुनाव करवाने ही पड़ेंगे। हमने न्यायपालिका के आदेश का सम्मान किया और अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों के सहयोग से चुनाव संपन्न करवाए और हम चुनाव जीत भी गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकार को यह चिंता सता रही है कि वे नगर निकायों और पंचायतों के चुनावों में पूरी तरह साफ हो जाएंगे। इसी हार के डर से, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद ये चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने बंगाल और बिहार में देखा है कि वहां क्या-क्या नहीं हुआ। देश बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। अगर लोकतंत्र ही नहीं बचेगा, तो हमारी वर्तमान और आने वाली युवा पीढ़ी का क्या होगा? इतिहास किसी को माफ नहीं करेगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि छात्रों और नौजवानों को राजनीति में आगे आना चाहिए। वे सभी राजनीतिक दलों की विचारधारा को समझें और अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएं, वरना यह देश बर्बादी की कगार पर चला जाएगा। आज जो लोग सत्ता में बैठे हैं, वे लोकतंत्र को पूरी तरह कमजोर करने में लगे हैं।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि आप शांतिपूर्ण धरना भी दे दें, तो आपके खिलाफ केस दर्ज कर दिया जाता है और जमानत तक नहीं होती। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां प्रदर्शन करने या सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को सीधे कोर्ट में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
Updated on:
22 Jun 2026 06:16 pm
Published on:
22 Jun 2026 06:11 pm
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