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Panchana Dam: पांचना बांध मामले पर बोले अशोक गहलोत, बॉर्डर इलाके में मस्जिदें चुन-चुन कर गिराने का लगाया आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांचना बांध विवाद को लेकर सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। वहीं सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और दरगाहों पर हो रही कार्रवाई को सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताते हुए इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़ा है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Jun 21, 2026

Ashok Gehlot

Ashok Gehlot: पांचना बांध मामले पर बोलते अशोक गहलोत (फोटो-@ashokgehlot51)

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांचना बांध विवाद और सीमावर्ती जिलों में चल रही प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनसे ऐसा लगता है कि राज्य में सरकार नाम की कोई व्यवस्था ही नहीं बची है। गहलोत ने कहा कि पांचना बांध का मामला भी इसी श्रेणी में आता है, जहां पिछले 15-20 दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन सरकार समाधान निकालने की दिशा में गंभीर प्रयास करती नजर नहीं आ रही।

गहलोत ने कहा कि पांचना बांध विवाद को लेकर कम से कम गुर्जर और मीणा समाज के पंच-पटेलों तथा जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बातचीत की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट लगातार आदेश दे रहा है और अधिकारी अवमानना की कार्रवाई के डर से दबाव में हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ समाधान की दिशा में कोई प्रगति नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और रेलवे पटरियों पर बैठने जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

गंभीरता से लेने का दिया सुझाव

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को तत्काल सभी पक्षों को बुलाकर संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रियों या पार्टी के जिम्मेदार लोगों की एक टीम बनाई जाए, जो संबंधित समुदायों से बातचीत कर समझाइश करे और समय रहते ऐसा रास्ता निकाले जिससे शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सके तथा सभी पक्षों के साथ न्याय हो।

जातीय संघर्ष पर क्या बोले अशोक गहलोत?

जातीय संघर्ष की आशंका से जुड़े सवाल पर गहलोत ने कहा कि मौजूदा हालात के लिए सरकार का रवैया जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां जातीय और सामाजिक तनाव को बढ़ाने वाली प्रतीत होती हैं। गहलोत ने कहा कि उन्हें यह केवल राजस्थान तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश में दिखाई देने वाली प्रवृत्ति लगती है।

सीमा क्षेत्र में मस्जिदें गिराने का आरोप

उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान सीमा से सटे बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद से इन इलाकों में न तो दंगे हुए और न ही कभी तनाव की स्थिति बनी, जबकि वहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं। इसके बावजूद अब कुछ क्षेत्रों में मस्जिदों और दरगाहों को चुन-चुनकर गिराया जा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी और असंतोष पैदा हो रहा है।

राजनीतिक ध्रुवीकरण का लगाया आरोप

अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई कर लोगों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि सरकार आखिर चाहती क्या है। उनके अनुसार यह सब राजनीतिक ध्रुवीकरण के एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चुनावी लाभ हासिल करना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए ऐसी घटनाओं का संदेश पूरे देश में जाता है और इससे धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिलता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एक ऐसी दरगाह पर भी कार्रवाई की गई, जहां पूरे गांव में कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता और वहां हिंदू समुदाय के लोग ही श्रद्धा के साथ जाते थे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी और स्थल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

जिला प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल

गहलोत ने जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या उनकी कार्रवाई संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर, एसडीएम, एसपी, कमिश्नर और आईजी सहित सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षों से कायम शांति, प्रेम और भाईचारे के माहौल को किसी भी कीमत पर प्रभावित न होने दें। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं और सरकार को समय रहते स्थिति संभालनी चाहिए।