
अमित दवे/जोधपुर. इसे अकर्मण्यता कहें या फि र उदासीनता कि प्रीपेड ऑटो बूथ व्यवस्था पूरी तरह से ठप होने से दूसरे शहरों से आने वाले यात्रियों को शहर के ऑटो चालक जमकर लूट रहे हंै। ऐसे में शहर की छवि तो खराब हो ही रही है। साथ ही, अधिकारियों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। जयपुर की तर्ज पर ही जोधपुर में भी रेलवे स्टेशन के बाहर प्रीपेड ऑटो बूथ लगाया गया था। शुरू के कुछ दिनों में यह बूथ चलता रहा। लेकिन बाद में जल्दी इस पर ताला लग गया। हालात यह है कि बूथ पूरी तरह कबाड़ में बदल चुका है। नतीजा यात्रियों को किराए के रूप में लुटना पड़ रहा है।
फि र भी, पुलिस व परिवहन विभाग इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। जोधपुर रेलवे स्टेशन पर टे्रन आते ही ऑटो चालक टिकट हॉल के बाहर ही जमावड़ा लगाकर खड़े हो जाते हैं और यात्रियों से ऑटो में चलने का दबाव बनाते रहते हैं। ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। रात व अलसुबह के समय तो चालक किराए में तीन से चार गुना तक वृद्धि कर देते हंै। जो यात्री ऑनलाइन कार, टैक्सी बुक करवाते हैं लेकिन ऑटो चालक अपनी मनमानी के कारण उनको स्टेशन के अंदर नहीं आने देते हैं। इससे यात्रियों को सामान उठाकर बाहर तक जाना पड़ता है।
सब कुछ तय पर पालना नहीं
रेलवे स्टेशन पर लगे प्रीपेड बूथ पर शहर के सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर जाने के लिए ऑटो का किराया तय किया हुआ है। इसके लिए प्रीपेड बूथ पर संबंधित जगह का नाम और उसके आगे किराए राशि भी अंकित होती है। प्रीपेड बूथ बंद होने की वजह से तय किराए के नियमों की पालना नहीं हो रही है। ऑटो चालक निर्धारित किराए राशि पर चलने के लिए तैयार नहीं होते हैं और अपनी मर्जी से किराया तय करते हैं।
मीटर है लेकिन चलाते नहीं
शहर के 90 फ ीसदी ऑटो रिक्शा में प्रीपेड मीटर लगे हुए हंै। कोई भी यात्री अगर इन मीटर को चालू करवाकर यात्रा करना चाहते हैं तो ऑटो चालक चलने से मना कर देते हंै। जो किराया मीटर में आता है उससे कहीं अधिक किराया यात्रियों से वसूलते हैं। ऐसे में दिनभर किसी भी ऑटो में मीटर चालू नहीं होता है। इससे भी यात्रियों को लुटना पड़ रहा है।
अधिकारी कहिन
अगर ऐसी बात है तो मैं इस संबंध में पता करवाती हूं और इस संबंध में उचित कदम उठाते है।
निर्मला विश्नोई, एडिशनल एसपी यातायात