
जोधपुर . पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई के गुर्गे जोधपुर के कुछ नामचीन व्यवसायियों से रंगदारी यानि अवैध वसूली की फिराक में थे। व्यवसायियों की इस सूची में मोबाइल व्यवसायी वासुदेव इसरानी भी शामिल था। हरेन्द्र व साथी दहशत में लाने के लिए वासुदेव के शोरूम में फायरिंग कर चुके थे। इसके बावजूद वह रुपए नहीं दे रहा था। उलटा लॉरेंस के गुर्गों की खिल्ली उड़ा रहा था। उसे सबके सिखाने के लिए लॉरेंस के गुर्गे हरेन्द्र ने अपने दोस्त भोमाराम विश्नोई को तैयार किया। बदले में उसे रुपए का लालच दिया गया था। इस पर वह गोली चलाने को तैयार हो गया था। उसने अपने दूसरे साथियों को साथ लिया था। यह बात अलग है कि व्यवसायी से न तो वसूली हो सकी और न ही भोमाराम व अन्य को धेला भी नहीं मिल पाए।
सरदारपुरा थानाधिकारी भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि १७ सितम्बर की देर रात वासुदेव को गोली मारने का आरोपी लोहावट में भीमसागर निवासी भोमाराम विश्नोई रुपए के लालच में लॉरेंस व हरेन्द्र के साथ मिल गया था। उसे हरेन्द्र व भैरो सिंह ने गोली चलाने के लिए तैयार किया था। भोमाराम व पंजाब में मोगा निवासी अमनप्रीत उर्फ पटवारी पुत्र तेजेन्द्रसिंह सिख को रविवार को अवकाशकालीन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से अमन को सात दिन के रिमाण्ड पर भेजने के आदेश दिए गए। जबकि शिनाख्त परेड के लिए भोमाराम को जेल भिजवा दिया गया।
हरेन्द्र ने भैरो व भैरो ने भोमाराम को दिया हथियार
पुलिस का कहना है कि व्यवसायी को गोली मारने के लिए तैयार होने के बाद हरेन्द्र ने हथियार की व्यवस्था की थी। उसने श्रीगंगानगर निवासी भैरो सिंह को हथियार दिए थे। भैरो सिंह ने हत्या से तीन दिन पूर्व भोमाराम को हथियार पहुंचाए थे।
किराए के फ्लैट में छुपाए लॉरेंस के शूटर
पंजाब में मोगा निवासी अमनप्रीत उर्फ पटवारी पढ़ाई कर रहा है। वह चण्डीगढ़ में सेक्टर ६३ के एक अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रह रहा था। वह पूर्व में हरेन्द्र और भोमाराम को फ्लैट में शरण दे चुका है। हत्या के बाद कार में जिले से बाहर निकलने वाले भोमाराम व साथी बीकानेर तक साथ थे। फिर अलग हो गए थे। भोमाराम को पहले भैरो सिंह ने श्रीगंगानगर व आस-पास के क्षेत्र में शरण थी। फिर दोनों नैनीताल भाग गए। वहां भैरो सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ गया, जबकि भोमाराम बच निकला था। वह चण्डीगढ़ लौट आया और अमन के ठिकाने पर छिपा रहा।