महंगाई ने शादियों की चमक फीकी कर दी है, खासकर सोने-चांदी के बढ़ते दामों ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि हाल में कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, फिर भी शादी वाले घरों का बजट अब भी दबाव में बना हुआ है।
सिरोही। महंगाई के इस दौर में शादियों का रंग-रूप बदलता जा रहा है। सिरोही सहित पूरे प्रदेश में विवाह समारोहों में सोने-चांदी के गहनों का महत्व तो बरकरार है, लेकिन दामों की ऊंची उड़ान ने परिवारों की नींद उड़ा दी है। हर माता-पिता अपनी बेटी की शादी के लिए बचपन से ही आभूषणों का संग्रह करने का सपना देखते हैं, लेकिन सोने-चांदी की कीमतों में आए उछाल ने इस सपने को अधूरा कर दिया है।
वर्तमान में सोना लगभग 1,60,300 रुपए प्रति दस ग्राम और चांदी करीब 2,50,000 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर है। दिलचस्प बात यह है कि महज एक माह पहले सोना 1,86,000 रुपए था, यानी अब करीब 25,700 रुपए सस्ता हो चुका है। इसी तरह चांदी भी 4,36,000 रुपए से गिरकर लगभग 1,86,000 रुपए कम होकर मौजूदा स्तर पर आ गई है। फिर भी शादियों वाले घरों में चिंता की लकीरें बनी हुई हैं।
शादी के लिए परिवार अलग-अलग मदों में बजट तय करते हैं — खानपान, सजावट, मेहमान नवाजी और गहने, लेकिन सोने-चांदी की कीमतों ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया है। अब लोग कम वजन के आभूषण बनवाने को मजबूर हैं और अन्य कार्यक्रमों में भी कटौती करनी पड़ रही है।
शादी-ब्याह भारतीय समाज का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इसमें गहनों की चमक और तोहफों की रौनक हमेशा से खास रही है, लेकिन महंगाई की मार ने इस परंपरा को भी बदल दिया है। पहले दुल्हन को भारी-भरकम सोने-चांदी के गहनों से सजाना प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था।
जहां पहले रिश्तेदारों और मेहमानों को सोने-चांदी के सिक्के या भारी गिफ्ट दिए जाते थे, वहीं अब ट्रेंड बदल रहा है। लोग उपयोगी और बजट-फ्रेंडली तोहफों की ओर झुक रहे हैं, जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम, घरेलू सामान या नकद राशि। इससे न केवल खर्च कम होता है, बल्कि तोहफे व्यावहारिक भी साबित होते हैं।
सोने-चांदी के बढ़े दामों का असर स्वर्णकारों के धंधे पर भी पड़ा है। पहले शादी के सीजन में ज्वैलर्स को फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन अब काम में कमी आ गई है। सीमित स्तर पर ही आभूषण बनवाए जा रहे हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
जेवराती आभूषणों के दाम आसमान छूने से मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लिए सोना-चांदी पहुंच से दूर होता जा रहा है। मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों को आवश्यक आभूषण भी कम वजन के बनवाकर काम चलाना पड़ रहा है। सोने के दाम बढ़ने से लोग कम वजनी आभूषण बनवा रहे हैं, जिससे व्यवसाय प्रभावित हुआ है और लोगों को अन्य मदों में कटौती करनी पड़ रही है।
इस बार शादियों के दौरान सोने-चांदी के दामों में वृद्धि से परिजनों का बजट बिगड़ गया है और दुकानदारों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। कई परिवार महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को सीमित स्तर पर आयोजित कर आभूषणों के लिए राशि जोड़ रहे हैं। खर्चों में कटौती के साथ धंधे पर भी मार पड़ी है।