
जोधपुर। जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों को वैट, शीशम की लकड़ी और जीएसटी व रिफण्ड के बाद अब नई समस्या से जूझना पड़ रहा है। यह समस्या विदेशों में करोड़ों रुपए अटकने की है। पिछले एक साल से निर्यातकों के विदेशों में करीब 40 करोड़ रुपए अटके पड़े हैं। निर्यातकों के अनुसार कई मामलों में निर्यातकों को विदेशों में भेजे गए माल का भुगतान नहीं होता। कभी कम्पनी दिवालिया हो जाती है तो, कभी बायर्स बड़े ऑर्डर के लालच में फंसाकर भुगतान नहीं करते।
कई मामलो में बायर तय होने के बाद भेजे गए माल को खराब बताते हुुए भुगतान करने से मना कर देते हैं। यूरोप में मंदी और अमरीका की व्यापार नीतियों में फेरबदल के कारण भी कई विदेशी ग्राहक टूट गए और निर्यातकों का पैसा अटक गया। कई फ्रॉड बायर निर्यातकों को एक-दो ऑर्डर का समय भुगतान कर उन्हें विश्वास में ले लेते है। बाद में, बड़े ऑर्डर देकर माल मंगवाकर पैसा हड़प लेते हैं। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें किसी बायर ने जोधपुर के निर्यातक के साथ फ्रॉड कर यहां के ही किसी दूसरे निर्यातक के साथ काम शुरू कर दिया। कई विदेशी ग्राहकों के लिए अब यह एक ट्रेंड बन चुका है।
पिछले तीन वित्तीय वर्ष की स्थिति
वर्ष------- मामले---- अटकी राशि (करोड़ में )
2015-16-- 26------- करीब 18
2016-17-- 39------- करीब 26
2017-18-- 51------- करीब 40
ब्लैक लिस्ट होगी तैयार
विदेशी ग्राहकों की ओर से फ्रॉड के मामले बढ़े हैं। निर्यातक की ओर से मदद मांगे जाने पर एसोसिएशन ने 9 मामलों में से 3 में निर्यातकों की फ ंसी राशि का भुगतान करवाया गया। एसोसिएशन ऐसे विदेशी ग्राहकों की एक ब्लैक लिस्ट भी तैयार कर रही है।
डॉ. भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
रिकवरी सेल लांच
ईपीसीएच विदेशों में फंसी भारतीय निर्यातकों की राशि निकलवाने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर प्रयास कर रहा है। इसके लिए ईपीसीएच ने रिकवरी सेल लांच की है। इसके तहत ईपीसीएच भारतीय निर्यातकों के प्रथम 1 हजार मामलों को हल करवाएगा।
राकेशकुमार, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच