
जोधपुर. शहर परकोटे की तंग गलियों और नुक्कड़ों पर बिजली के उलझे तार या घरों की छतों-रैलिंग से होकर गुजरता खतरा आपको सहज ही दिख जाता है। मानसून के सीजन में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उदयमंदिर आसन में 11 केवी तार के सम्पर्क में आने से एक ही परिवार के झुलसे लोगों की घटना ने इस खतरे की घंटी बजा दी है। खास बात यह है कि सरकार 11 केवी बिजली लाइन से परकोटे को बचाने का प्रोजेक्ट भी पास करने के मूड में नहीं है। यूं तो नए जीएसएस और अन्य बिजली सिस्टम को मजबूत करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर रही है, लेकिन जो प्रोजेक्ट या बजट हजारों जिंदगियों के लिए महत्वपूर्ण है। उस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। भीतरी शहर में बिजली लाइनों का खतरा कम करने के लिए 40 करोड़ का प्रोजेक्ट बना कर भेजा गया था, लेकिन इंटीग्रेटेड पावर डवलपमेंट स्कीम के तहत19 करोड़ रुपए ही स्वीकृत हुए हैं।
ऐसे मिल सकती है राहत
- भीतरी शहर में एलटी लाइन और 11 केवी लाइन का जाल है।
- डिस्कॉम शहर वृत्त के अधिकारियों ने 40 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया।
- पूरे शहर में बिजली लाइनों को इंसुलेटेड करने का प्रोजेक्ट है।
- लेकिन आईपीडीएस योजना में स्वीकृति सिर्फ 19 करोड़ रुपए की मिली है।
- इस राशि में से सिर्फ एलटी लाइन ही इंसुलेटेड की जा सकेगी।
- 21 करोड़ का बजट और मिले तो पूरे शहर में 11 केवी लाइन भी सुरक्षित की जा सकती है।
यह है इंसुलेटेड कोटिंग
डिस्कॉम विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसुलेटेड कोटिंग होने के बाद कोई भी वस्तु बिजली लाइन के सम्पर्क में आती है तो करंट नहीं देती। बिजली के तार गीले होंगे और वह लोहे की वस्तु भी छूती है, तो करंट की आशंका कम रहती है। शहर में करीब 10 किलोमीटर 11 केवी लाइन इंसुलेटेड कोटिंग की गई है। इसमें डेढ़ करोड़ रुपए का खर्च आया था। अब करीब 100-150 किलोमीटर 11 केवी लाइन और सैकड़ों किलोमीटर एलटी लाइन इंसुलेटेड करनी है।
अंडरग्राउंड लाइन डालना मुश्किल
भीतरी शहर में अंडरग्राउंड बिजली लाइन डालना मुश्किल है। सन 2013 से 2016 के दौरान री-एसिलरेटेड पावर डवलपमेंट रिफॉर्म प्रोजेक्ट (आर-एपीडीआरपी) के तहत शहर के कई हिस्सों में अंडरग्राउंड बिजली लाइन डाली गई थी। इस दौरान भीतरी शहर में सर्वे हुआ था, लेकिन तब भूमिगत जलस्तर बहुत अधिक बढ़ा हुआ था। कई जगह पर पांच फीट खुदाई पर ही पानी निकल रहा था। इसी कारण यह प्रोजेक्ट रोक दिया गया।
हर साल बारिश से पहले रखरखाव
मानसून से पहले हर साल दो महीने तक डिस्कॉम फीडर मेंटनेंस भी करता है। प्रतिदिन औसतन दो से तीन घंटे का शटडाउन लिया जाता है। प्रत्येक फीडर क्षेत्र में पेड़ों की छंगाई, ढीले बिजली तार और बिजली पोल दुरुस्त करने का काम किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद हर साल करंट लगने की घटनाएं होती हैं।
अधिशासी अभियंता करेंगे दो स्तर की जांच
उदयमंदिर आसन क्षेत्र में जो करंट से नौ जने चपेट में आए, उसकी जांच अधिशासी अभियंता आरएन विश्नोई करेंगे। शुरुअती जांच के बाद अंतिम जांच भी दो स्तर ही होगी। प्रारंभिक जांच निरीक्षण मंगलवार को किया गया।
इनका कहना है...
उदयमंदिर आसन में जो हादसा हुआ, उसकी जांच अधिशासी अभियंता से करवा रहे हैं। जहां तक शहर में अंडरग्राउंड लाइन डालने की बात है, वह संभव नहीं है। आईपीडीएस योजना के तहत 19 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इस राशि से एलटी लाइन इंसुलेटेड करने का काम करवाया जाएगा।
जेके सोनी, अधीक्षण अभियंता, शहर वृत्त, जोधपुर डिस्कॉम