पीड़िता ने 11 अप्रैल को नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद 7 मई को एसपी के नाम पत्र भेजकर आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। 10 मई को व्हाट्सएप कॉल पर धमकियों की जानकारी पुलिस को दी थी। पुलिस मूकदर्शक बनी रही। आखिरकार 15 मई को उसने आरोपियों के गांव में टंकी पर चढ़कर कीटनाशक खा लिया और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
जोधपुर: 'मेरी दोनों बहनों की मौत की जिम्मेदार पुलिस है…अगर समय पर कार्रवाई होती तो आज वे जिंदा होतीं।' यह कहते-कहते भाई की आंखें भर आई, जिस बहन के लिए वह न्याय मांग रहा था, उसका शव पिछले दो दिन से एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी में पड़ा था। दूसरी बहन इससे पहले ही ब्लैकमेलिंग और देहशोषण से तंग आकर जान दे चुकी थी। परिवार का आरोप है कि दोनों मौतों के पीछे सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि पुलिस की निष्क्रियता भी जिम्मेदार हैं।
गैंगरेप पीड़िता की आत्महत्या के बाद शनिवार को परिजन आक्रोशित रहे। परिजन, समाज के लोग और ग्रामीण मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को मुआवजा और लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
तत्पश्चात बावड़ी चौकी प्रभारी धर्मेंद्र को लाइन हाजिर कर दिया। जबकि मामले की जांच अब एएसपी सिकाऊ रघुनाथ गर्ग को सौंपी गई है। मृतका के भाई की रिपोर्ट पर आठ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पीड़िता ने 11 अप्रैल को नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद 7 मई को एसपी के नाम पत्र भेजकर आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही। 10 मई को व्हाट्सएप कॉल पर मिली धमकियों की जानकारी भी उसने थानाधिकारी को दी थी। परिजनों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
आरोपियों के हौसले बढ़ते गए और पीड़िता का डर गहराता गया। आखिरकार, 15 मई को उसने आरोपियों के गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़कर कीटनाशक खा लिया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पीड़िता लगातार शिकायतें कर रही थी, धमकियों की जानकारी दे रही थी, तब पुलिस ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की? 34 दिन तक कार्रवाई लंबित रहने के बाद अब जांच अधिकारी बदलना और चौकी प्रभारी को हटाना कहीं न कहीं पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उसकी बड़ी बहन को पूनियों की बासनी निवासी महिपाल भाकर ने दुष्कर्म कर वीडियो बना ब्लैकमेल करना शुरू किया। आरोप है कि आरोपी उसे दुकान पर बुलाकर लगातार देहशोषण करता रहा। बाद में उसके साथियों ने भी शोषण किया। वीडियो वायरल करने और बदनाम करने की धमकियों से परेशान होकर बड़ी बहन ने 20 मार्च को आत्महत्या कर ली।
परिवार अभी उस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि आरोपियों ने छोटी बहन को निशाना बनाना शुरू कर दिया। मृतका ने पुलिस को बताया था कि आरोपियों ने बड़ी बहन का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे भी बुलाया और दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, धमकाकर रुपए भी ऐंठते रहे।
शनिवार को एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर माहौल बेहद भावुक रहा। पिता और भाई बार-बार यही कह रहे थे कि अगर पुलिस समय पर सुन लेती तो मेरी बहनें आज जिंदा होतीं। समाज के लोगों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मारवाड़ राजपूत सभा अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा ने जांच अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।
दोनों बहनों की मौत हमारे सिस्टम की कार्यशैली पर करारा तमाचा है। गैंगरेप जैसे जघन्य अपराध में पुलिस अधिकारी संवेदनहीन बन गए। न्याय नहीं मिलता देखकर दोनों ने बारी-बारी से हार मानकर ह्यूमन जीवन खत्म कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में हुई दोनों बहनों की मौत के बाद पुलिस सवालों के घेरे में है।