Jodhpur Airport: 6 एयरोब्रिज से लैस जोधपुर के नए एयरपोर्ट टर्मिनल को रेलवे ब्रिज की तरह एमएस स्ट्रक्चर में तैयार किया गया है। बड़ी बात ये है कि इतना लोहा लगाया गया है कि 50 साल बाद वापस बनाने में निर्माण खर्च पूरा निकल जाएगा।
Jodhpur New Airport Terminal: जोधपुर शहर का नया एयरपोर्ट टर्मिनल 350 करोड़ की लागत से बनकर पूरी तरह तैयार है और अब केवल उद्घाटन की औपचारिकता बाकी है, लेकिन इसकी बनावट और ‘हेरिटेज लुक’ को लेकर बहस छिड़ गई है। शुरुआत में जोधपुरी पत्थर से पारंपरिक पहचान देने की योजना थी, मगर निर्माण में आधुनिक तकनीक और ग्लास फाइबर आधारित सामग्री को प्राथमिकता दी गई, जिससे स्थानीय स्थापत्य की झलक सीमित रह गई।
बता दें कि नया एयरपोर्ट टर्मिनल 350 करोड़ रुपए में 3 साल में बना है। यह 6 एयरोब्रिज से लैस है। रेलवे ब्रिज की तरह एमएस स्ट्रक्चर में तैयार किया गया है, इतना लोहा लगा है कि 50 साल बाद वापस बनाने में निर्माण खर्च पूरा निकल जाएगा।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 2023 में दिल्ली की कंपनी स्वदेशी इंडिया को निर्माण का जिम्मा सौंपा था। प्रोजेक्ट में पारंपरिक पत्थर की बजाय जीएफआरसी (ग्लास फाइबर रिइनफोर्स्ड कंक्रीट) का इस्तेमाल किया गया, जो सीमेंट, रेत, पॉलीमर और ग्लास फाइबर के मिश्रण से तैयार होता है। एजेंसी इसे हल्का, टिकाऊ और किफायती बताती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे अधिक कार्बन फुटप्रिंट वाला मानते हैं।
एमबीएम विश्वविद्यालय के आर्किटेक्ट डॉ. कमलेश कुमार के अनुसार स्थानीय पत्थर का उपयोग न होने से ग्रीन रेटिंग हासिल करने में बाधा आ सकती है और भवन शहर की पारंपरिक पहचान को पूरी तरह नहीं दर्शा पाएगा। गौरतलब है कि जोधपुर में नया रेलवे स्टेशन भी बन रहा है जिसको छीतर पत्थर से हेरिटेज लुक दिया जा रहा है। एम्स जोधपुर भी पूरी तरीके से छीतर के पत्थर से तैयार हो रहा है।
नया टर्मिनल पूरी तरह एमएस (माइल्ड स्टील) आधारित मॉड्यूलर स्ट्रक्चर पर बनाया गया है। यही वजह है कि विशाल स्पैन के बावजूद लाउंज क्षेत्र में केवल छह कॉलम ही लगाए गए हैं। यह तकनीक रेलवे ओवरब्रिज जैसे ढांचों में उपयोग होती है, जिससे निर्माण तेज और सुगम हुआ। करीब 240 गुणा 110 मीटर क्षेत्र में फैला यह टर्मिनल पुराने भवन से लगभग तीन गुना बड़ा है।
यहां छह एयरोब्रिज लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को सीधे टर्मिनल से विमान में प्रवेश की सुविधा मिलेगी। पुराने टर्मिनल में यह सुविधा नहीं थी। योजना के अनुसार वर्ष के अंत तक सभी उड़ानों का संचालन नए टर्मिनल से शुरू कर दिया जाएगा, जबकि पुराने भवन को एयरपोर्ट म्यूजियम या एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस यूनिट में बदला जा सकता है।
नए टर्मिनल की नींव वर्ष 2017 में विभिन्न एजेंसियों के बीच हुए समझौते से पड़ी। एयरपोर्ट अथॉरिटी, भारतीय वायुसेना, रक्षा संपदा विभाग, नगर निगम और राज्य सरकार के बीच समन्वय के तहत 37 एकड़ रक्षा भूमि उपलब्ध कराई गई। इसके बदले नगर निगम ने समान भूमि वायुसेना को दी और अतिरिक्त 69 एकड़ का भुगतान कर अधिग्रहण किया गया।
जोधपुर एयरपोर्ट की स्थापना 1930 के दशक में तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने करवाई थी। ब्रिटिश काल में रॉयल एयरफोर्स के उपयोग में रहा यह एयरपोर्ट आज भी सामरिक दृष्टि से अहम है। 1950 के दशक में यहां से नागरिक उड़ानें शुरू हुई थी।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार टर्मिनल पूरी तरह तैयार है और उद्घाटन का इंतजार है।
-मनोज उनियाल, निदेशक, जोधपुर एयरपोर्ट
स्थानीय पत्थर के अभाव में जीआरआईएचए 5-स्टार रेटिंग हासिल करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि जीएफआरसी का कार्बन फुटप्रिंट अधिक है। इसके अलावा डिजाइन में पारंपरिक आर्किटेक्चर की झलक सीमित है।
-कमलेश कुम्हार, आर्किटेक्ट, एमबीएम विश्वविद्यालय जोधपुर
टेंडर शर्तों के अनुसार ही जीएफआरसी का उपयोग किया गया है। अब केवल उद्घाटन शेष है।
-संजय रॉय, प्रोजेक्ट मैनेजर, स्वदेशी इंडिया