
जोधपुर. जोधपुर का पब्लिक पार्क कई मायनों में खास है। शहर और पर्यटकों की पहुंच में है यह पर्यटन स्थल। यह रेलवे स्टेशन और बस अड्डे दोनों जगह से पास पड़ता है। इस पार्क में इतना बड़ा म्यूजियम है कि आप खूबसूरत और नायाब चीजें देखते ही रह जाएं। आइए जानें इसकी रोचक कहानी :
लॉर्ड किचनर के जोधपुर आने पर हुआ था निर्माण
अतीत के झरोखे बताते हैं कि पब्लिक पार्क के सरदार म्यूजियम की लॉर्ड किचनर के जोधपुर आने पर सन 1909 में आयोजित मारवाड़ शिल्प कला प्रदर्शनी के समय स्थापना हुई थी। यह संग्रहालय भी पहले सोजती गेट के बाहर था। वहां से पहले राई का बाग स्थित एक इमारत में और बाद में सूरसागर ले जाया गया था। कालांतर में भारत सरकार ने 1916 में इसे मान्यता दी। यह संग्रहालय सन 1921 में दरबार स्कूल भवन और 1936 में पब्लिक पार्क स्थित इमारत में शिफ्ट किया गया था। इस म्यूजियम को जुलाई-अगस्त २०१७ में तब नई जिंदगी मिल गई, जब इसे सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी की इमारत भी मिल गई और इस इमारत को नायाब वस्तुएं रखने के लिए अच्छी जगह मिल गई।
सातवीं और आठवीं सदी की अद्वितीय चीजें
अब यह एक बड़ा राजकीय संग्रहालय है। खासियत यह है कि इस म्यूजियम में मारवाड़ की प्राचीन राजधानी मंडोर के उपवन की खुदाई के समय भूगर्भ से मिली सातवीं और आठवीं शताब्दी की गोलाकार चांदी की 30 छोटी छोटी मुद्राएं भी सुरक्षित हैं। इसमें 650 से 1100 ईस्वीं तक के सिक्के सुरक्षित हैं। म्यूजियम के कलक्शन में सांभर के नमक से निर्मित सौ बरस पुराने सुराही, कप, प्लेट,कटोरे, जाम व गिलास आदि भी दर्शनीय हैं। इतिहासकार प्रो. विनीता परिहार के अनुसार आधुनिक जोधपुर के निर्माता महाराजा उम्मेदसिंह ने बहुत सोच समझ कर शहर को सैर सपाटे के लिए उस समय उम्मेद उद्यान के रूप में एक खुली जगह दी थी। यह उनकी व्यापक सोच का ही परिणाम था।