जोधपुर

Exclusive : ‘हॉलीवुड में अमरीका फ्रेंडली फिल्में, तो भारत में नेशनलिस्ट क्यों नहीं?’, एक्ट्रेस व सांसद कंगना की जोधपुर में ‘पत्रिका’ से ख़ास बातचीत

जोधपुर में अपनी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के ग्रैंड प्रीमियर पर पहुंचीं कंगना रनौत। एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में खोला राजस्थान से पुराना नाता। बोलीं- 'मैं राणावत हूं, जो हिमाचल में रनौत हो गई'।
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Updated: 12 Jun 2026, 2:53 PM IST
Kangana Ranaut Jodhpur Interview Bharat Bhagya Vidhata Cama Hospital Nurse Role
Kangana Ranaut Exclusive Interview

बॉलीवुड अभिनेत्री व सांसद कंगना रनौत गुरुवार को अपनी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के ग्रेण्ड प्रीमियर में भाग लेने जोधपुर में रहीं। प्रीमियर शो के दौरान पत्रिका के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कंगना ने फिल्म और राजनीति से लेकर सभी पहलुओं पर बात की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:-

Q. राजस्थान व जोधपुर से आपका जुड़ाव कैसा है?

A. राजस्थान मेरे दिल में बसा है। मेरे पूर्वज यहीं के हैं। मैं भी राणावत हूं लेकिन हिमाचल प्रदेश जाकर रनौत हो गई। जोधपुर भी आती-जाती रहती हूं।

Q. 26/11 पर बनी अन्य फिल्मों से 'भारत भाग्य विधाता' कैसे अलग है?

A. यह फिल्म ऐसे लोगों को मंच प्रदान करती है जो बहादुरी, मेहनत, देशभक्ति दिखाने के बावजूद सम्मान प्राप्ति से वंचित कर दिए जाते हैं। फिल्म संवेदनशीलता बताती है।

Q. फिल्म में आपने नर्स का रोल किया है। समाज में नर्स की भूमिका को लेकर अब आपके क्या विचार है?

A. नर्स का रोल निभाने के बाद मुझे लगा कि नर्स आंतरिक दृढ़ता और मानसिक शक्ति की प्रतीक है। दूसरों का ध्यान रखने के चक्कर में खुद की मेंटल हेल्थ पर नर्स ध्यान ही नहीं दे पाती।

Q. आपने 'क्वीन', 'मणिकर्णिका', 'थलाइवी' और 'इमरजेंसी' जैसी फिल्मों में मजबूत महिला किरदार निभाए हैं। 'भारत भाग्य विधाता' का किरदार उनसे किस मायने में अलग है?

A. बाकी के किरदार जाने-पहचाने थे, लेकिन नर्स की भूमिका निभाना रियलिस्टक चैलेंज था। यह एक तरह से केस स्टडी जैसा था।

Q. पहले फिल्म का नाम कामा अस्पताल पर केंद्रित था। अब इसका नाम क्यों बदला गया?

A. कामा अस्पताल नाम थोडा संकुचित लग रहा था। जैसे केवल डॉक्टर-नर्स पर केंद्रित है जबकि इसमें सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी, पुलिस सहित कई व्यक्तियों की भूमिकाएं महत्वपूर्ण थी।

Q. 26/11 हमले के बाद कामा अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों की बहादुरी को देखते हुए उन्हें एक महीने का इंक्रीमेंट देने का वादा तक पूरा किया गया था, जो अब नहीं हुआ है। अभी आपकी सरकार है, क्या आप इस बारे में सरकार से बात करेंगी?

A. इस बात ने मुझे भी झकझोर दिया। मैं प्रधानमंत्री से बात करूंगी कि उन नर्सेज को सही सम्मान दिया जाए।

Q. ओटीटी और सोशल मीडिया के दौर में आप फिल्मों को कैसे देखती हैं?

A. हम लोग इतनी मेहनत से फिल्म बनाते हैं जिसके बाद ही उसे सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलती है, जबकि ओटीटी और सोशल मीडिया उन कंटेंट से भरे हैं जिस पर सेंसर बोर्ड कैंची चला देता है। इन प्लेटफॉर्म के लिए भी अब सेंसर बॉडी की जरूरत है।

Q. आप सांसद भी है और कलाकार भी, दोनों भूमिकाओं में आप क्या अंतर पाती है?

A. मैं सांसद भले ही बन गई हूं लेकिन रहूंगी हमेशा कलाकार ही।

Q. दर्शक 'भारत भाग्य विधाता' थिएटर में क्यों देखें?

A. फिल्म दुनिया की तरह जीवन के पर्दे के पीछे भी बहुत कुछ चलता है। ऐसे में युवाओं और आने वाले पीढ़ियों को जीवन की कहानी बताने के लिए ऐसे फिल्में दिखानी आवश्यक है।

Q. फिल्मों के राजनीतिकरण के विषय में आप क्या कहेंगी?

A. फिल्मों का राष्ट्रीयकरण हो रहा है तो बुराई ही क्या है। हॉलीवुड तो अमरीका फ्रैंण्डली फिल्में बनाता है।

Q. कामा अस्पताल घटनाक्रम में शहीद हुए लोगों के परिजन यदि यह इंटरव्यू देख रहे हैं तो आप उनको क्या कहना चाहेंगी?

A. हम उनको कहना चाहेंगे कि वे हमारी प्रेरणा है। उनका तहेदिल से आभार व्यक्त करती हूं।

Q. क्या आप चाहेंगी कि सरकार इस फिल्म को पूरे देश में टैक्स फ्री करें?

A. फिल्म देखते समय आपको अंगेज होना पड़ता है। इसमें सामान्य तरीके का धूम धड़ाका वाला आकर्षण नहीं है। दर्शकों को फिल्म से प्रेम मिलेगा तो सरकार भी कुछ करेगी।

Updated on:
12 Jun 2026, 2:53 PM IST
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