
Sachin Pilot On Ashok Gehlot at Dausa
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट की पुण्यतिथि के अवसर पर दौसा जिले के भंडाना स्थित उनके स्मृति स्मारक पर कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज चेहरों का जमावड़ा देखने को मिला। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी भंडाना में एक विशेष सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया और स्वर्गीय पायलट की सादगीपूर्ण एवं जन-कल्याणकारी विरासत को याद किया। इस भावुक कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने दोनों बेटों- आरान पायलट और विहान पायलट के साथ अपने पूज्य पिता के स्मारक पर पहुंचे और पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रार्थना सभा के संपन्न होने के ठीक बाद जब मीडिया के कैमरों ने सचिन पायलट को घेरा, तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अपने बहु-चर्चित राजनैतिक संबंधों को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिसकी गूंज अब दिल्ली से लेकर जयपुर के सियासी गलियारों तक साफ सुनाई दे रही है।
पिछले कुछ दिनों से राजस्थान कांग्रेस के भीतर अंदरूनी समीकरणों और नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहटों को लेकर चल रही खबरों के बीच सचिन पायलट का यह बयान बेहद परिपक्व और सकारात्मक राजनैतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है। अशोक गहलोत के पुराने बयानों का संदर्भ देते हुए पायलट ने बेहद खुलकर और बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात मीडिया के सामने रखी।
सचिन पायलट ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत जी का वह वक्तव्य बहुत अच्छी तरह से सुना है। उस बयान के संदर्भ में मुझे मीडिया के माध्यम से बस इतना ही कहना है कि अशोक गहलोत जी का स्नेह, अपनापन और गहरा लगाव जैसे उनके अपने बेटे वैभव गहलोत के साथ हमेशा रहता है, ठीक वैसा ही स्नेह, आशीर्वाद और लगाव मेरे साथ भी उनका निरंतर बना हुआ है। हम सब आखिरकार कांग्रेस पार्टी के ही सच्चे और समर्पित सिपाही हैं।"
उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के विज़न का जिक्र करते हुए कहा, "हमारे नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जो सबसे बड़ा और ऐतिहासिक संदेश पूरे देश की जनता को दिया था कि हमें नफरत के बाजार में 'मोहब्बत की दुकान' खोलनी है, हम सब उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। हम सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस दमनकारी और जन-विरोधी शासन का पूरी मजबूती से मुकाबला करना है। उस महान मुहिम के भीतर कांग्रेस पार्टी का हर एक छोटा-बड़ा कार्यकर्ता, पदाधिकारी, नेता और हर पीढ़ी के लोग कंधे से कंधा मिलाकर धरातल पर कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि राजस्थान कांग्रेस हमेशा से आंतरिक रूप से बेहद मजबूत रही है और पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मिसाल बनी है।"
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हाल ही में सचिन पायलट पर पुरानी राजनीतिक बगावत को लेकर तीखे वार किए थे, जिससे राजस्थान कांग्रेस की आपसी कलह एक बार फिर गरमाई हुई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सियासी गलियारों में पायलट को दोबारा राजस्थान कांग्रेस (PCC) का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
गहलोत ने मीडिया से बातचीत में दावा करते हुए कहा था कि सितंबर 2022 में जब उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की बात चल रही थी, तब जयपुर में विधायकों ने जो बगावत की थी, वह पार्टी आलाकमान के खिलाफ नहीं थी।उन्होंने कहा कि सरकार बचाने वाले 100 से अधिक विधायक इस बात पर अड़ गए थे कि कोई भी मुख्यमंत्री बन जाए, लेकिन वे सचिन पायलट को मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि उन्होंने 2020 में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार गिराने की कोशिश की थी।
गहलोत ने एक बड़ा खुलासा करते हुए ये भी कहा कि जब केंद्र में UPA की सरकार थी, तब सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाने की प्रक्रिया में उन्होंने ही मदद की थी।उन्होंने खुलकर मलाल जताया कि पायलट ने आज तक अपनी जुबान से कभी इस मदद को स्वीकार नहीं किया या इसके लिए मेरा आभार भी नहीं माना।
गहलोत ने कहा कि जब पायलट 2-3 साल के बच्चे थे, तब से वह उनके परिवार को जानते हैं और उनके प्रति स्नेह रखते हैं। लेकिन पायलट के सलाहकार उन्हें गलत राह दिखाते हैं।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पायलट ने जो अतीत में गलतियां की हैं, उन्हें वे स्वीकार करना सीखें। वे सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, इसीलिए यह मुद्दा बार-बार उठ रहा है।
वहीं मुख्यमंत्री पद की रेस और नेतृत्व परिवर्तन के सवालों पर गहलोत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वह तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब किसी पद की दौड़ में नहीं हैं।
श्रद्धांजलि सभा के इस मंच से सचिन पायलट ने देश और प्रदेश की वर्तमान कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के भीतर सामने आई कथित धांधलियों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार परहमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के रोजगार और परीक्षाओं की शुचिता को लेकर सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है।
भाजपा की नीतियों की आलोचना करते हुए पायलट ने कहा, "देश के सामने आज बेरोजगारी और पेपर लीक जैसी इतनी बड़ी और गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोग अपनी कमियां छुपाने में मसरूफ हैं। भाजपा की गलत नीतियों ने देश के लगभग 22 लाख से अधिक होनहार बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटका कर खराब कर दिया है। नीट (NEET Exam) के पेपर सरेआम लीक हो रहे हैं, देश के अलग-अलग राज्यों में दर्जनों अन्य भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार लगातार चारों तरफ फैल रहा है। आज देश के गरीब और अन्नदाता किसान की वास्तविक आमदनी बढ़कर दोगुनी होने के बजाय घटकर आधी रह गई है। घरेलू तेल और गैस के सिलेंडरों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम मध्यमवर्गीय परिवार की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। लगातार इस देश के भीतर जो तानाशाही व्यवस्था चलाई जा रही है, उसके खिलाफ देश का पूरा विपक्ष अब एकजुट होकर आवाज उठा रहा है।"
दिल्ली में हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठकों का हवाला देते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों का गठबंधन अब संसद से लेकर सड़क तक भाजपा को घेरने के लिए पूरी तरह से रणनीति तैयार कर चुका है। उन्होंने भाजपा के रिपोर्ट कार्ड पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
पायलट ने कहा, "हाल ही में दिल्ली में हमारे इंडिया अलायंस (INDIA Alliance) की एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक संपन्न हुई है। उस बैठक में शामिल सभी राजनैतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने दोबारा यह दृढ़ संकल्प लिया है कि हम सब एकजुट होकर जनता की आवाज बनेंगे और भाजपा की जन-विरोधी नीतियों का डटकर मुकाबला करेंगे। हमारा एकमात्र उद्देश्य देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और जननेता राहुल गांधी ने जो कांग्रेस संगठन को एक नया, ऊर्जावान नेतृत्व प्रदान किया है, जिससे पार्टी के भीतर एक नया संगठनात्मक सृजन हुआ है, उस मुहिम में हम सब पूरी ताकत से जुटे हैं।"
भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को देश की सत्ता संभालते हुए लगभग 12 साल का लंबा समय बीत चुका है। लेकिन ये लोग आज भी अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों- पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह को लगातार कोसते रहते हैं। मेरा इनसे सीधा सवाल है कि आप कब तक इतिहास के पीछे छुपते रहेंगे? इन 12 सालों के शासनकाल में आपने खुद क्या काम किया है, उसका वास्तविक रिपोर्ट कार्ड लेकर आपको देश की जनता की अदालत में जाना चाहिए। ये लोग आंतरिक रूप से चुनावों से बुरी तरह डर रहे हैं, लेकिन देश और प्रदेश की जनता ने अब अपना मन पूरी तरह से बना लिया है। विपक्ष अब पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा और भारतीय जनता पार्टी चाहे जितनी भी राजनैतिक तिकड़म लगा ले, कांग्रेस पूरे देश में मजबूत है और सबसे ज्यादा मजबूत हमारे राजस्थान के भीतर है।"
दौसा के भंडाना स्थित इस स्मृति स्थल पर आयोजित हुई सर्वधर्म प्रार्थना सभा में विभिन्न अंचलों से आए नवनिर्वाचित सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रार्थना सभा में प्रमुख रूप से शामिल होने वाले नेताओं में दौसा के स्थानीय सांसद मुरारीलाल मीणा, करौली-धौलपुर के सांसद भजनलाल जाटव, और हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर संभाग के सांसद कुलदीप इंदौरा, विधायक मुकेश भाकर, मनीष यादव, लक्ष्मण मीणा, डीसी बैरवा, रामनिवास गांवरिया, विधायक अमीन कागजी, विधायक अनिता जाटव, युवा नेता अभिमन्यु पूनिया, पूर्व कद्दावर मंत्री हेमराम चौधरी, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, पूर्व मंत्री ममता भूपेश, पूर्व मंत्री शकुंतला रावत, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव धीरज गुर्जर, अर्चना शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, डॉ. जितेंद्र सिंह और दीपेंद्र सिंह शेखावत सहित हजारों की संख्या में स्थानीय किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
Updated on:
11 Jun 2026 12:58 pm
Published on:
11 Jun 2026 12:34 pm
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