
कैलाश सारस्वत/जोधपुर. पोक्सो कानून की विशेष अदालत के न्यायाधीश बीएल जाट ने तीन साल की मासूम बालिका के साथ बलात्कार के मामले में रिकार्ड साढ़े तीन महिने में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी 25 वर्षीय कैलाश भील को आजीवन कारावास सजा देकर ऐतिहसिक फैसला सुनाया। राइकाबाग रेलवे स्टेशन के पास पिछले वर्ष 10 अक्टूबर की इस घटना के तुरंत बाद जीआरपी पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल के नजदीक से गिरफ्तार कर लिया था। 15 दिन में अनुसंधान कर कोर्ट में चालान पेश कर दिया।
न्यायालय ने भी मामले की गम्भीरता को देखते हुए 113 दिन में 15 सुनवाई में विचारण पूरा कर फैसला सुना दिया। अभियोजन ने 30 गवाह पेश किये। सरकार की ओर से नियुक्त विशिष्ट लोक अभियोजक दिनेशकुमार शर्मा ने अंतिम बहस करते हुए कहा कि बलात्कार का यह अत्यंत विक्षिप्त मामला है। आरोपी ने मां के पास सो रही मासूम बच्ची का अपहरण कर उसके साथ शर्मनाक तथा मानव जाति को कलंकित करने वाला दुष्कर्म किया है। ऐसे दुष्कर्मी को फांसी की सजा दी जाए। आरोपी की ओर से नरमी बरतने का आग्रह किया गया। न्यायाधीश बीएल जाट ने बलात्कार के दोषी कैलाश भील को बालकों के साथ लैंगिक अपराधों से सुरक्षा अधिनियम की धारा 5एम व 6 तथा भारतीय दण्ड संहिता की दफा 363 ए व 376 एबी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दरिंदे ने बच्ची को नोच डाला था
10 अक्टूबर 2018 की रात एक खानाबदोश परिवार राइकाबाग रेलवे स्टेशन पर रामदेवरा जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहा था। पति-पत्नी तथा मासूम बच्ची रात 11बजे एक नम्बर प्लेटफॉर्म पर सो गए। रात के करीब बारह बजे आरोपी युवक मां के पास सो रही बच्ची को नींद में ही उठाकर ले गया। वह उसे केएन कॉलेज के सामने राइकाबाग ओवरब्रिज के नीचे झाडिय़ों में ले जाकर मासूम के साथ बलात्कार कर दिया। इस दौरान मां को बच्ची नहीं मिलने पर उसने पति को जगाया तथा बच्ची की तलाश शुरू की। लोगों ने जीआरपी पुलिस को सूचना दी। पुलिस की सघन तलाशी के दौरान बच्ची रोती हुई झाडिय़ों में मिल गई।
पुलिस ने वहां से भीलवाड़ा जिले के शम्भुगढ़ आसींद में बारनी गांव निवासी कैलाश पुत्र राजकुमार भील को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपी ने बलात्कार करना कबूल कर लिया। जीआरपी पुलिस ने 11 अक्टूबर की सुबह आरोपी का मेडिकल कराया। बलात्कार पीडि़ता बच्ची को दरिंदे ने नोच डाला था। बच्ची की गंभीर हालत के चलते उम्मेद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर बच्ची की जान बचाई। पुलिस ने त्वरित अनुसंधान कर आरोपी के खिलाफ 25 अक्टूबर को न्यायालय में चार्टशीट पेश दी। न्यायालय ने साढ़े तीन महिने में फैसला सुनाकर दोषी को सजा दी है।