जोधपुर

बॉर्डर के इस पार शांति, लेकिन पाकिस्तान में नजर आ रही ऐसी खतरनाक चीज, जानें पूरा मामला

राजस्थान की सीमा से लगते पाकिस्तान के क्षेत्रों में भी मानसून बरसा, जिसके चलते वहां रेगिस्तान में पहले से मौजूद टिड्डी ने प्रजनन किया और अण्डे दे दिए। इससे होपर और एकल टिड्डी पैदा हो गई।
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Updated: 25 Aug 2023, 9:49 AM IST
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जोधपुर। जून-जुलाई में अच्छी बारिश के कारण पाकिस्तान के नोरा, चोलिस्तार और थारपारकर मरुस्थल में भी कुछ टिड्डी रिपोर्ट की गई है जो एकल यानी सोलिटरी श्रेणी की है। कुछ टिड्डी ने प्रजनन भी किया है। हालांकि पाक में भी टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम चल रहा है। इधर अगस्त में मानसून का सूखा होने की वजह से राजस्थान में टिड्डी लगभग पूरी नियंत्रित हो चुकी है। बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर के पॉकेट एरिया में थोड़ी बहुत टिड्डी जो थी, वह समाप्त कर दी गई है। आने वाले दिनों में मानसून की बरसात कम होने से टिड्डी प्रजनन का खतरा नहीं रहेगा।


पाक तक हुई मानसून की अच्छी बारिश
दरअसल जुलाई महीने में मानसून की अच्छी बारिश हुई। राजस्थान की सीमा से लगते पाकिस्तान के क्षेत्रों में भी मानसून बरसा, जिसके चलते वहां रेगिस्तान में पहले से मौजूद टिड्डी ने प्रजनन किया और अण्डे दे दिए। इससे होपर और एकल टिड्डी पैदा हो गई। संख्या में कम होने से उस पर जल्द ही नियंत्रण स्थापित कर लिया गया।

इथोपिया व इरिट्रिया के कुछ भागों में टिड्डी
वर्तमान में अफ्रीकी देश इथोपिया और इरिट्रिया के कुछ भागों में ही टिड्डी है, जहां नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बारिश कम होने से अन्य क्षेत्रों में टिड्डी पनपने का मौका नहीं मिला।

फिलहाल देश में कहीं पर भी टिड्डी नहीं है। कुछ समय पहले राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में जो हॉपर व एकल टिड्डी मिली थी, उस पर पूरा नियंत्रण किया जा चुका है।

- डॉ वीरेंद्र कुमार, सहायक निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन, जोधपुर

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